
Property Fraud: जमीन खरीदने का सपना लेकर एक व्यक्ति ने 18 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन रजिस्ट्री के बाद उसे पता चला कि जिस जमीन का वह मालिक बना है, वह पहले ही किसी और के नाम दर्ज हो चुकी है। मामला पीपीगंज थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गोरखपुर के पीपीगंज नगर के वार्ड नंबर-2 निवासी वीरेंद्र कुमार का आरोप है कि ज्ञानधर यादव, गब्बर यादव उर्फ राम आशीष यादव, रामप्रवेश चौधरी और प्रह्लाद ने उन्हें 45 डिसमिल खेती योग्य जमीन दिखाई। बातचीत के बाद जमीन का सौदा तय हुआ और उन्होंने कुल 18 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए। पीड़ित के मुताबिक, 15 लाख रुपये बैंक के जरिए, 2 लाख रुपये नकद और 1 लाख रुपये चेक से भुगतान किया गया।
वीरेंद्र कुमार का कहना है कि पूरी रकम लेने के बाद आरोपियों ने पहले दिखाई गई जमीन को अनुपयुक्त बताते हुए दूसरी जमीन देने की बात कही। भरोसा दिलाकर उसी दूसरी जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम करा दी गई। उन्हें उस समय किसी तरह की गड़बड़ी का अंदेशा नहीं हुआ।
असल मामला तब सामने आया, जब वीरेंद्र कुमार ने जमीन की दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया शुरू कराई। जांच में पता चला कि जिस जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम हुई है, वह पहले ही किसी दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज हो चुकी थी। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।
पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने कई बार अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन आरोपियों ने केवल 1.50 लाख रुपये लौटाए। अब भी 16.50 लाख रुपये बकाया हैं। काफी कोशिशों के बाद भी रकम वापस नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस की शरण ली।
पीपीगंज पुलिस ने पीड़ित की तहरीर के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष कमलेश प्रताप सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जमीन से जुड़े अभिलेख, रजिस्ट्री दस्तावेज और भुगतान के साक्ष्यों की जांच होगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।