ग्वालियर

पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति लाभों पर एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राशि रोकने पर दिया सख्त आदेश

MP High Court - एमपी हाईकोर्ट ने पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ रोकने पर सख्ती दिखाई, सिर्फ एफआईआर दर्ज होने से नहीं रोकी जा सकती सेवानिवृत्ति राशि, पूर्व प्राचार्या को 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने के आदेश
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MP High Court major ruling on pension gratuity and retirement benefits
पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ रोकने पर एमपी हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई- Demo Pic

Pension- सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति लाभों पर एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने मात्र से उसकी पेंशन, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को रोका नहीं जा सकता। जब तक अदालत पुलिस रिपोर्ट या चालान पर न्यायिक संज्ञान नहीं ले लेती, तब तक न्यायिक कार्यवाही लंबित नहीं मानी जा सकती। ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मुरैना के शासकीय कन्या महाविद्यालय की पूर्व प्रभारी प्राचार्या व प्रोफेसर डॉ. कमलेश श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। शासकीय सेवकों के पेंशन और सेवानिवृत्ति परिलाभों को लेकर यह फैसला काफी अहम बनाया जा रहा है।

केवल प्रोविजनल पेंशन से चल रहा था गुजारा

याचिकाकर्ता प्रोफेसर डॉ. कमलेश श्रीवास्तव वर्तमान में कैंसर (थर्ड स्टेज) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से जूझ रही हैं। वे मुरैना के शासकीय कन्या महाविद्यालय में वर्ष 2020 से 2022 के बीच प्रभारी प्राचार्या के पद पर कार्यरत थीं और 30 नवंबर 2023 को प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुईं। 2015 के छात्रवृत्ति के पुराने विवाद के कारण डॉ. कमलेश श्रीवास्तव की पेंशन फंसा दी गई थी। केवल प्रोविजनल पेंशन से उनका गुजारा चल रहा था।

एफआईआर को आधार बनाकर पेंशन, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश का भुगतान रोक दिया

निजी कॉलेजों के छात्रों की छात्रवृत्ति वितरण से जुड़े एक पुराने विवाद को लेकर डॉ. कमलेश श्रीवास्तव व अन्य के खिलाफ वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस एफआईआर को आधार बनाकर विभाग ने उनकी पूरी पेंशन, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश का भुगतान रोक दिया और केवल अनंतिम (प्रोविजनल) पेंशन दी जा रही थी।

तय सीमा के भीतर भुगतान नहीं तो बकाया पर 12 फीसदी वार्षिक की दर से ब्याज देना होगा

हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने सिर्फ एफआईआर दर्ज होने से सेवानिवृत्ति राशि रोकने को अनुचित बताया। कोर्ट ने कहा कि जब तक अदालत चालान पर संज्ञान न ले, तब तक न्यायिक कार्यवाही लंबित नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 90 दिनों के भीतर 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ पूरी बकाया राशि का भुगतान करने को कहा है। यह चेतावनी भी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो पूरी बकाया राशि पर 12 फीसदी वार्षिक की दर से ब्याज देना होगा।

Updated on:
02 Aug 2026 01:34 pm
Published on:
02 Aug 2026 01:34 pm