
हमीरपुर के अतरौलिया मोहल्ले में हुई वृद्ध शिवराम अहिरवार की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। जिस पिता ने अपने इकलौते बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, वही बेटा उनकी मौत का कारण बन गया। घटना के बाद सामने आईं बातें इस हत्याकांड को और भी दर्दनाक बना रही हैं।
62 वर्षीय शिवराम अहिरवार पिछले करीब 20 वर्षों से पत्नी सुषमा देवी और परिवार के साथ अतरौलिया मोहल्ले में रह रहे थे। परिवार का गुजर-बसर गन्ने के जूस की दुकान से होता था, जबकि उनका बेटा नरेश चौधरी ई-रिक्शा चलाता था। पड़ोसियों के मुताबिक पिता-पुत्र के बीच अक्सर कहासुनी होती रहती थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि विवाद हत्या तक पहुंच जाएगा।
मंगलवार शाम मामूली बात को लेकर दोनों के बीच फिर झगड़ा हुआ। आरोप है कि गुस्से में नरेश ने पहले घर के अंदर पिता के साथ मारपीट की। जान बचाने के लिए शिवराम घर से बाहर भागे, लेकिन नरेश ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। वह लकड़ी की पटिया लेकर सड़क पर दौड़ा और करीब 200 मीटर तक पीछा कर पिता को बेरहमी से पीटता रहा। जब शिवराम सड़क पर गिर पड़े तब भी हमले नहीं रुके और उनके सिर पर कई वार किए गए।
स्थानीय लोगों के शोर मचाने पर आरोपी मौके से भाग निकला, लेकिन रास्ते में लोगों को खुद ही बताने लगा कि उसने अपने पिता की हत्या कर दी है। सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में नरेश ने जो वजह बताई, उसने सभी को हैरान कर दिया। उसका कहना है कि पिता अक्सर उसे रात में जल्दी सोने के लिए कहते थे और इसी बात को लेकर दोनों में विवाद होता था। उसने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले पिता ने उसकी पिटाई की थी। हालांकि, उसने साफ कहा कि उसे पिता की हत्या का कोई पछतावा नहीं है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य न होने की बात भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। उधर, शिवराम की मौत के बाद पत्नी सुषमा देवी, बहू और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहल्ले में हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है कि क्या इतना छोटा विवाद किसी पिता की जान लेने की वजह बन सकता है?