
बेतवा नदी पर जारी है SDRF टीम का रेस्क्यू ऑपरेशन (फोटो- IANS)
Hamirpur Bridge Collapse: "रोज की तरह बेतवा नदी पर बन रहे 800 मीटर लंबे पुल पर काम चल रहा था। करीब 60 फीसदी काम पूरा भी हो चुका था, पिलर खड़े थे और उन पर भारी-भरकम कंक्रीट के स्लैब रखे जा रहे थे। पांच स्लैब रखे जा चुके थे, सब कुछ सामान्य था।
पुल पर दो शिफ्टों में काम चल रहा था। पहली शिफ्ट के हमारे साथी मजदूर नीचे थे और दूसरी शिफ्ट के हम 7 लोग ऊपर काम कर रहे थे। तभी अचानक मौसम ने करवट बदली। देखते ही देखते तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। आंधी इतनी तेज थी कि ऊपर खड़े रहना नामुमकिन हो गया। जान बचाने के लिए हम सातों मजदूर पुल के ऊपर ही पेट के बल लेट गए। हम बस आंधी के थमने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन तभी एक जोरदार धमाका हुआ और चीख-पुकार मच गई।"
साथ काम कर रहे प्रत्यक्षदर्शी सुरेश ने कांपती आवाज में उस मंजर बयां करते हुए बताया कि जब धमाके के बाद मैंने आंखें खोली तो धूल के गुबार और मूसलाधार बारिश के बीच सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं। आंधी के उस एक झोंके ने सब कुछ तबाह कर दिया था। स्लैब ताश के पत्तों की तरह ढह चुका था और उसके नीचे हमारे ही साथी खून से लथपथ मलबे में दबे तड़प रहे थे।
थोड़ी देर में पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। रात के घने अंधेरे, गड़गड़ाते बादलों और भारी मलबे के बीच क्रेन और मशीनों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन जबतक उनको बाहर निकाला गया तब तक 6 की मौत हो गई थी।
पुलिस के मुताबिक, मृतकों में लोकेंद्र जिनकी उम्र 22 वर्ष थी, कुलदीप निषाद 19 वर्ष, सावंत यादव 28 वर्ष, सभाजीत 30 वर्ष, पुष्पेंद्र चौहान 34 वर्ष और राजेश पाल 42 वर्ष शामिल हैं। प्रशासन ने बताया कि इनमें से दो मजदूर हमीरपुर के ही स्थानीय निवासी थे जबकि अन्य चार पड़ोसी जिले बांदा के रहने वाले थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे का तुरंत संज्ञान लेते हुए दुख जताया है। उन्होंने कहा कि बेतवा नदी पर हुए इस हादसे में लोगों की जान जाना बेहद दुखद और हृदय विदारक है। उन्होंने जिला प्रशासन को एसडीआरएफ के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों का मुफ्त व बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
हमीरपुरके कुरारा ब्लॉक में मोरा कंदर और कंदौर गांवों को आपस में जोड़ने के लिए बेतवा नदी पर 800 मीटर लंबे एक बड़े पुल का निर्माण किया जा रहा था। साल 2024 से चल रहे इस प्रोजेक्ट का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। अधिकारियों के मुताबिक, पुल के पिलर खड़े हो चुके थे और उन पर कंक्रीट के स्लैब रखे जा रहे थे। अब तक पांच स्लैब रखे जा चुके थे। गुरुवार रात जब मजदूर काम कर रहे थे तभी अचानक तेज तूफान और बारिश आ गई। इसी दौरान पुल का एक भारी स्लैब सीधे मजदूरों के ऊपर आ गिरा, जिसमें 6 मजदूरों की मौत हो गई।
Updated on:
29 May 2026 01:00 pm
Published on:
29 May 2026 12:35 pm
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