
Acute Rheumatic Fever Symptoms: बच्चों या किशोरों में गले का संक्रमण (स्ट्रेप थ्रोट) होना आम बात है। ज्यादातर मामलों में सही इलाज के बाद यह ठीक भी हो जाता है। लेकिन अगर बैक्टीरियल गले के संक्रमण का समय पर इलाज न हो, तो कुछ हफ्तों बाद शरीर में ऐसी समस्या शुरू हो सकती है जो सिर्फ गले तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दिल, जोड़ों, त्वचा और यहां तक कि मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकती है। इस स्थिति को एक्यूट रूमैटिक फीवर (ARF) कहा जाता है।
ICMR (Indian Council of Medical Research) और Cleveland Clinic के अनुसार, यह बीमारी सीधे बैक्टीरिया की वजह से नहीं होती, बल्कि संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) की असामान्य प्रतिक्रिया के कारण विकसित होती है।
NCBI Bookshelf (StatPearls) के अनुसार, एक्यूट रूमैटिक फीवर एक सूजन (Inflammatory Disease) है, जो आमतौर पर ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया से होने वाले गले के संक्रमण के 2 से 4 सप्ताह बाद विकसित हो सकती है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही ऊतकों पर हमला करने लगती है। इसका असर सबसे ज्यादा दिल, जोड़ों, त्वचा और तंत्रिका तंत्र पर पड़ सकता है।
अगर कुछ सप्ताह पहले गले में तेज दर्द या संक्रमण हुआ था और अब अचानक बुखार आने लगा है, तो इसे सामान्य वायरल बुखार मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ICMR के अनुसार, बुखार एक्यूट रूमैटिक फीवर के शुरुआती लक्षणों में शामिल हो सकता है।
एक्यूट रूमैटिक फीवर का सबसे आम लक्षण माइग्रेटरी आर्थराइटिस है। यानी आज घुटने में दर्द हो सकता है और अगले दिन टखने या कोहनी में। दर्द के साथ सूजन, लालिमा और चलने-फिरने में परेशानी भी हो सकती है। Cleveland Clinic के अनुसार, यह लक्षण अक्सर बड़े जोड़ों (घुटने, टखने, कोहनी, कलाई) में दिखाई देता है।
इस बीमारी की सबसे गंभीर जटिलताओं में से एक है कार्डाइटिस, यानी दिल में सूजन। NCBI Bookshelf बताता है कि यदि समय पर इलाज न मिले, तो कुछ मरीजों में दिल के वाल्व प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आगे चलकर रूमैटिक हार्ट डिजीज होने का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ मरीजों की त्वचा पर हल्के गुलाबी या लाल रंग के गोलाकार दाने (Rash) दिखाई दे सकते हैं। हालांकि यह लक्षण हर मरीज में नहीं होता, लेकिन यह एक्यूट रूमैटिक फीवर का एक पहचाना हुआ संकेत है।
कुछ बच्चों में संक्रमण के कुछ समय बाद हाथ, पैर या चेहरे की मांसपेशियों में अनियंत्रित हरकतें शुरू हो सकती हैं। इसे Sydenham Chorea कहा जाता है। ICMR के अनुसार, यह एक्यूट रूमैटिक फीवर की एक न्यूरोलॉजिकल जटिलता है।
किन बच्चों में ज्यादा खतरा होता है?
Cleveland Clinic के अनुसार, एक्यूट रूमैटिक फीवर का खतरा सबसे ज्यादा 5 से 15 साल के बच्चों में देखा जाता है।जो बच्चे बार-बार स्ट्रेप थ्रोट से संक्रमित होते हैं या जिनका संक्रमण समय पर ठीक नहीं होता, उनमें जोखिम बढ़ सकता है।
एक्यूट रूमैटिक फीवर का कोई एक टेस्ट नहीं होता। डॉक्टर मरीज के लक्षण, हाल में हुए गले के संक्रमण की जानकारी और कुछ जांचों के आधार पर बीमारी की पुष्टि करते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं-
NCBI और ICMR के मुताबिक, इस बीमारी के इलाज का मुख्य लक्ष्य शरीर से संक्रमण को पूरी तरह खत्म करना, अंदरूनी सूजन को कम करना और दिल को किसी भी बड़े नुकसान से बचाना होता है। इसे ठीक करने के लिए डॉक्टर्स आमतौर पर एंटीबायोटिक और सूजन कम करने वाली दवाएं देते हैं। इसके साथ ही मरीज को पूरा आराम करने की सलाह दी जाती है, और कुछ गंभीर मामलों में लंबे समय तक पेनिसिलिन प्रोफिलैक्सिस (Penicillin Prophylaxis) की जरूरत भी पड़ सकती है।
अगर किसी को गले का संक्रमण हुआ है, तो उसके 2 से 4 हफ्ते बाद सेहत पर खास नजर रखनी चाहिए। यदि इस दौरान मरीज को लगातार बुखार रहे, जोड़ों में दर्द या सूजन हो, सांस फूले, सीने में दर्द या तेज धड़कन महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। इसके अलावा हाथ-पैरों का अनियंत्रित हिलना या शरीर पर लाल दाने दिखना भी खतरे के संकेत हैं। ऐसे लक्षण उभरते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।
ICMR का साफ कहना है कि एक्यूट रूमेटिक फीवर (Acute Rheumatic Fever) जैसी गंभीर स्थिति से बचने का सबसे पक्का तरीका सतर्कता है। जब भी ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकल यानी गले का संक्रमण हो, तो सही समय पर उसकी पहचान कर तुरंत पूरा इलाज शुरू करें। सबसे जरूरी बात यह है कि डॉक्टर ने एंटीबायोटिक का जो भी कोर्स तय किया है, उसे बीच में अधूरा न छोड़ें और हमेशा पूरा करें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।