
हार्ट अटैक के बाद हर मिनट होता है कीमती (photo- freepik)
Cardiogenic Shock Symptoms: हार्ट अटैक के दौरान सबसे बड़ी चिंता सिर्फ दिल की धड़कन नहीं होती, बल्कि यह भी होती है कि क्या दिल पूरे शरीर तक पर्याप्त खून पहुंचा पा रहा है। कई बार हार्ट अटैक के बाद मरीज की हालत अचानक तेजी से बिगड़ने लगती है। ब्लड प्रेशर गिरने लगता है, सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है और शरीर के जरूरी अंगों तक खून की सप्लाई कम होने लगती है। इस गंभीर स्थिति को कार्डियोजेनिक शॉक कहा जाता है।
Mayo Clinic के अनुसार, कार्डियोजेनिक शॉक एक मेडिकल इमरजेंसी है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि, तेजी से अस्पताल पहुंचने और तुरंत इलाज शुरू होने पर मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है।
NCBI Bookshelf (StatPearls) के अनुसार, कार्डियोजेनिक शॉक तब होता है जब दिल इतनी ताकत से खून पंप नहीं कर पाता कि शरीर के अंगों की जरूरत पूरी हो सके। इसका सबसे आम कारण गंभीर हार्ट अटैक होता है, लेकिन कुछ अन्य दिल संबंधी समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। जब दिल की पंपिंग क्षमता अचानक कम हो जाती है, तो दिमाग, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाते।
कार्डियोजेनिक शॉक का सबसे प्रमुख संकेत बहुत कम ब्लड प्रेशर होना है। Mayo Clinic के अनुसार, जब दिल पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता, तो ब्लड प्रेशर तेजी से गिर सकता है। इसके कारण व्यक्ति को चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है।
अगर हार्ट अटैक के बाद अचानक सांस फूलने लगे या आराम की स्थिति में भी सांस लेने में परेशानी हो, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कमजोर पंपिंग के कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है।
कार्डियोजेनिक शॉक में शरीर खून को सबसे पहले दिमाग और दिल जैसे महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंचाने की कोशिश करता है। इसके कारण हाथ-पैर ठंडे पड़ सकते हैं और त्वचा ठंडी व पसीने से भीगी हुई महसूस हो सकती है। यह लक्षण तुरंत मेडिकल जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।
StatPearls के अनुसार, कार्डियोजेनिक शॉक में नाड़ी तेज हो सकती है, लेकिन उसकी ताकत कमजोर महसूस होती है। यह इस बात का संकेत है कि दिल पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पा रहा।
जब किडनी तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचता, तो पेशाब की मात्रा कम हो सकती है। अगर मरीज कई घंटों तक बहुत कम पेशाब कर रहा है, तो यह शरीर में रक्त प्रवाह कम होने का संकेत हो सकता है।
दिमाग तक ऑक्सीजन कम पहुंचने पर व्यक्ति को भ्रम, बेचैनी, अत्यधिक कमजोरी या प्रतिक्रिया देने में कठिनाई हो सकती है।परिवार के सदस्य अक्सर इसे सामान्य कमजोरी समझ लेते हैं, लेकिन हार्ट अटैक के बाद यह गंभीर चेतावनी हो सकती है।
Journal of the American Heart Association (JAHA) में प्रकाशित शोध के अनुसार, कार्डियोजेनिक शॉक में इलाज शुरू करने में जितनी ज्यादा देरी होती है, मरीज में जटिलताओं और मृत्यु का खतरा उतना बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि समय पर हार्ट की रक्त आपूर्ति बहाल करना (Revascularization), जरूरी दवाएं और इंटेंसिव केयर मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मायो क्लिनिक के मुताबिक, कार्डियोजेनिक शॉक (Cardiogenic Shock) का जोखिम उन लोगों में ज्यादा देखा जाता है जो गंभीर हार्ट अटैक झेल चुके हैं, जिनकी उम्र अधिक है, या जो पहले से दिल की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा डायबिटीज और धमनियों में ब्लॉकेज वाले मरीजों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इन समस्याओं से पीड़ित हर व्यक्ति को यह शॉक लगेगा ही।
स्टेटपर्ल्स के अनुसार, इस गंभीर स्थिति का इलाज अस्पताल के इमरजेंसी या आईसीयू (ICU) में तुरंत शुरू किया जाता है। डॉक्टरों का मुख्य उद्देश्य शरीर में खून का बहाव सामान्य बनाए रखना, दिल की पंपिंग क्षमता को सुधारना और हार्ट अटैक का फौरन उपचार करना होता है। मरीज की हालत को देखते हुए जरूरत पड़ने पर एंजियोप्लास्टी, स्टेंट लगाने या अन्य आधुनिक मेडिकल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
अगर हार्ट अटैक के दौरान या बाद में सीने में तेज दर्द, सांस लेने में भारी तकलीफ, अचानक बीपी गिरना, त्वचा का ठंडा पड़ना और पसीना आना जैसे लक्षण दिखें, तो यह खतरे की घंटी है। बेहोशी, भ्रम या बहुत तेज-कमजोर नाड़ी चलने पर बिना वक्त गंवाए तुरंत इमरजेंसी मदद लें। ऐसी आपातकालीन स्थिति में खुद गाड़ी चलाकर जाने के बजाय एम्बुलेंस बुलाना ही सबसे सुरक्षित फैसला होता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
03 Jul 2026 03:05 pm
