
ADEM Symptoms: अगर आपका बच्चा कुछ दिन पहले तक बिल्कुल स्वस्थ था, लेकिन अचानक उसे चलने में लड़खड़ाहट होने लगे, हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस हो, धुंधला दिखने लगे या उसका व्यवहार अचानक बदल जाए, तो इसे सिर्फ थकान या सामान्य वायरल संक्रमण का असर समझकर नजरअंदाज न करें। हालांकि ऐसे लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये ADEM (एक्यूट डिसैमिनेटेड एन्सेफेलोमाइलाइटिस) नाम की एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH), Cleveland Clinic और Boston Children's Hospital के अनुसार, ADEM एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की नसों को ढकने वाली सुरक्षात्मक परत (मायलिन) पर हमला कर देती है। इससे मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेशों का आदान-प्रदान प्रभावित हो सकता है।
ADEM का पूरा नाम एक्यूट डिसैमिनेटेड एन्सेफेलोमाइलाइटिस है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में अचानक होने वाली सूजन (Inflammation) से जुड़ी बीमारी है। NIH के अनुसार, यह समस्या अधिकतर बच्चों में देखी जाती है और अक्सर किसी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कुछ दिनों या हफ्तों बाद विकसित हो सकती है। बहुत कम मामलों में यह टीकाकरण के बाद भी हो सकती है, लेकिन ऐसा दुर्लभ होता है।
Cleveland Clinic के अनुसार, ADEM का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। माना जाता है कि संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मायलिन पर हमला कर देती है। यह बीमारी अक्सर वायरल संक्रमण और कुछ बैक्टीरियल संक्रमण साथ ही बहुत दुर्लभ मामलों में टीकाकरण के बाद देखी जा सकती है।
NIH के अनुसार, ADEM और Multiple Sclerosis (MS) दोनों में मायलिन प्रभावित होती है, लेकिन दोनों अलग बीमारियां हैं।ADEM आमतौर पर एक बार होने वाली बीमारी होती है। यह बच्चों में अधिक देखी जाती है। इसमें बुखार और मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण अधिक सामान्य होते हैं। जबकि MS में बीमारी बार-बार लौट सकती है।
डॉक्टर बच्चे के लक्षणों और न्यूरोलॉजिकल जांच के आधार पर कुछ परीक्षण करा सकते हैं, जैसे:
Boston Children's Hospital के अनुसार, ADEM का इलाज मुख्य रूप से मस्तिष्क की सूजन कम करने पर केंद्रित होता है।इलाज में स्टेरॉयड दवाएं, इंट्रावेनस इम्युनोग्लोब्युलिन (IVIG), कुछ गंभीर मामलों में प्लाज्मा एक्सचेंज शामिल हो सकते हैं। इलाज हमेशा न्यूरोलॉजिस्ट की निगरानी में किया जाता है।
अधिकांश बच्चों में समय पर इलाज मिलने पर अच्छी रिकवरी की संभावना होती है। हालांकि कुछ बच्चों में कमजोरी, ध्यान लगाने में कठिनाई या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं कुछ समय तक बनी रह सकती हैं। इसलिए नियमित फॉलो-अप जरूरी होता है।
यदि बच्चे में अचानक चलने में दिक्कत हो, हाथ-पैरों में कमजोरी आ जाए, धुंधला दिखने लगे, बार-बार उल्टी हो, भ्रम, अत्यधिक सुस्ती या दौरे पड़ें, तो तुरंत अस्पताल या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।