स्वास्थ्य

स्टेज-4 कैंसर और मौत थी सामने…AIIMS दिल्ली में महिला के पेट से निकला 19.9 किलो का ट्यूमर

AIIMS Delhi News: एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने स्टेज-4 कोलन कैंसर से जूझ रही महिला के पेट से 19.9 किलो ट्यूमर निकालकर नई जिंदगी दी। जानें पूरी कहानी।
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Jan 24, 2026
AIIMS Delhi
AIIMS Delhi (photo- gemini ai)

AIIMS Delhi News: एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी कर मेडिकल इतिहास में नया उदाहरण पेश किया है। डॉक्टरों ने 43 साल की महिला मरीज के पेट से 19.9 किलो का विशाल ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचाई। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि मरीज को स्टेज-4 कोलन कैंसर था और उसे पहले केवल कुछ महीनों की जिंदगी बताई गई थी।

कौन हैं मरीज मुनमुन?

मरीज का नाम मुनमुन है, जो पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली हैं। जुलाई 2024 में वे AIIMS दिल्ली पहुंचीं, तब उनका पेट असामान्य रूप से काफी ज्यादा फूला हुआ था। करीब 25 साल पहले उनका एक ऑपरेशन हुआ था, जिसमें एक ओवरी और एक फेलोपियन ट्यूब निकाली गई थी। जांच में पता चला कि उन्हें कोलन कैंसर है, जो पेट के कई अंगों में फैल चुका था।

पहले इलाज से नहीं मिला फायदा

मुनमुन इससे पहले कई बड़े अस्पतालों में इलाज करा चुकी थीं। उन्होंने कीमोथेरेपी के कई राउंड भी लिए, लेकिन बीमारी पर कोई असर नहीं पड़ा। कैंसर लगातार बढ़ता गया और पेट के लगभग सभी अंग ट्यूमर से घिर गए। CT और PET-CT स्कैन में साफ दिख रहा था कि पूरा पेट ट्यूमर से भरा है, अलग-अलग अंग पहचानना भी मुश्किल था। ऐसे में इस केस को इनऑपरेबल माना जा रहा था।

दो चरणों में किया गया हाई-रिस्क ऑपरेशन

AIIMS दिल्ली में सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट प्रोफेसर एम.डी. रे की टीम ने हार नहीं मानी। मरीज की हालत देखते हुए उन्होंने ऑपरेशन को दो चरणों में करने का फैसला लिया। पहले चरण में ट्यूमर का बड़ा हिस्सा निकाला गया। इस दौरान कोलन का बड़ा भाग, छोटी आंत का हिस्सा, गर्भाशय, दोनों फेलोपियन ट्यूब, ओमेंटम, लिवर का कुछ हिस्सा और पेट की झिल्ली तक हटानी पड़ी। ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था क्योंकि बड़ी नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा था और काफी खून भी बहा।

HIPEC तकनीक से खत्म किया माइक्रोस्कोपिक कैंसर

दो दिन बाद ऑपरेशन का दूसरा चरण किया गया, जिसमें मरीज को HIPEC (हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) दी गई। इसमें गरम कीमोथेरेपी सीधे पेट के अंदर दी जाती है, ताकि आंखों से न दिखने वाली कैंसर कोशिकाएं भी खत्म हो सकें। यह प्रक्रिया करीब डेढ़ घंटे तक चली।

तेजी से हुई रिकवरी

ऑपरेशन के बाद मुनमुन को ICU में रखा गया, लेकिन अगले ही दिन वे मुस्कुरा रही थीं। पांच दिन के अंदर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के अनुसार, अब पेट के अंदर कोई दिखाई देने वाला ट्यूमर नहीं बचा है।

डॉक्टरों की अहम सलाह

प्रो. एम.डी. रे का कहना है कि मेटास्टेटिक कोलन कैंसर को बिना पूरी जांच के लाइलाज नहीं मानना चाहिए। सही समय पर और अनुभवी डॉक्टरों के पास इलाज से गंभीर मामलों में भी उम्मीद बची रहती है। भारत में कोलन कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे गलत खानपान, तंबाकू, शराब, मोटापा, तनाव और खराब जीवनशैली बड़ी वजह हैं।

Updated on:
24 Jan 2026 11:25 am
Published on:
24 Jan 2026 11:25 am
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