Anger Heart Attack Risk: नई स्टडी में खुलासा, सिर्फ 8 मिनट का गुस्सा ब्लड वेसल्स को कमजोर कर सकता है और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है। United States में हुई रिसर्च से सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई।
Anger Heart Attack Risk: हाल ही में हुई एक नई स्टडी में सामने आया है कि गुस्सा सिर्फ मूड खराब नहीं करता, बल्कि दिल और ब्लड सर्कुलेशन पर भी सीधा असर डाल सकता है। शोध के मुताबिक, अगर आप सिर्फ 8 मिनट तक भी गुस्से में रहते हैं, तो इससे आपकी रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) की काम करने की क्षमता काफी कम हो सकती है। इतना ही नहीं, इसका असर करीब 40 मिनट तक बना रह सकता है। यानी बार-बार गुस्सा करना धीरे-धीरे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
इस स्टडी में 280 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें कोई दिल की बीमारी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर नहीं था। लोगों को चार ग्रुप में बांटा गया। कुछ लोगों को 8 मिनट तक गुस्से वाली यादें याद करने को कहा गया, कुछ को उदासी या चिंता से जुड़ी यादें सोचने को कहा गया, जबकि बाकी लोगों को सामान्य रहने के लिए सिर्फ गिनती करने को कहा गया।
इसके बाद वैज्ञानिकों ने देखा कि उनकी ब्लड वेसल्स कितनी अच्छी तरह फैल और सिकुड़ पा रही हैं। नतीजा चौंकाने वाला था, जिन लोगों ने गुस्से को याद किया, उनकी ब्लड वेसल्स की फैलने की क्षमता लगभग आधी हो गई। बाकी लोगों में ऐसा असर नहीं देखा गया।
जब आप गुस्सा करते हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन तेजी से बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को सख्त कर देते हैं, जिससे ब्लड वेसल्स आसानी से नहीं फैल पातीं। इससे खून का बहाव धीमा हो जाता है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल पर ज्यादा दबाव पड़ता है। एक बार गुस्सा आने से स्थायी नुकसान नहीं होता, लेकिन अगर ऐसा बार-बार हो, तो ब्लड वेसल्स को ठीक होने का समय नहीं मिलता। लंबे समय में इससे धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
स्टडी में यह भी पाया गया कि उदासी या चिंता का ब्लड वेसल्स पर उतना असर नहीं पड़ा जितना गुस्से का पड़ा। यानी गुस्सा दिल के लिए खास तौर पर ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है।
अगर आपको जल्दी गुस्सा आता है, तो कुछ आसान आदतें मदद कर सकती हैं:
कभी-कभार गुस्सा आना सामान्य है, लेकिन बार-बार गुस्सा करना दिल की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए भावनाओं को संभालना सिर्फ मानसिक नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।