स्वास्थ्य

Autism Risk : गर्भावस्था में डिप्रेशन की दवा लेने से बच्चे को ऑटिज्म हो सकता है? गायनेकोलॉजिस्ट और मनोचिकित्सक से जानिए

Autism Risk During Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान डिप्रेशन की दवा (एंटीडिप्रेसेंट) लेने वाली महिलाओं के मन में अक्सर डर रहता है कि कहीं इससे बच्चे को ऑटिज्म या ADHD जैसी समस्या तो नहीं हो जाएगी।

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May 20, 2026
डिप्रेशन का शिकार प्रेग्नेंट महिला- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- patrika)

Autism Risk During Pregnancy: गर्भावस्था का समय महिलाओं के लिए शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई महिलाओं को इस दौरान चिंता, तनाव या डिप्रेशन की समस्या होने लगती है। ऐसे में डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट दवाएं देते हैं, लेकिन दवा शुरू करते ही मन में एक डर बैठ जाता है, क्या इससे बच्चे को ऑटिज्म हो सकता है?

अब इस सवाल का जवाब नई रिसर्च ने दिया है, जिससे लाखों गर्भवती महिलाओं को राहत मिल सकती है। मनोचिकित्सक डॉक्टर आदित्य सोनी (MD, Psychiatrist) और गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर शैलजा अग्रवाल ने पत्रिका के साथ बातचीत में इसको लेकर ये बातें बताई हैं-

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क्या है रिसर्च?

The Guardian में प्रकाशित एक बड़ी रिसर्च में 37 स्टडीज का विश्लेषण किया गया। इसमें करीब 6 लाख ऐसी गर्भवती महिलाओं का डेटा देखा गया, जिन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान एंटीडिप्रेसेंट दवाएं ली थीं। वहीं, लगभग 2.5 करोड़ महिलाओं के डेटा की तुलना भी की गई जिन्होंने ऐसी दवा नहीं ली थी। रिसर्च में शुरुआत में ऐसा लगा कि दवा लेने वाली महिलाओं के बच्चों में ऑटिज्म का खतरा थोड़ा ज्यादा दिख रहा है।

लेकिन जब वैज्ञानिकों ने मां की मानसिक स्थिति, पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक कारणों जैसे फैक्टर्स को शामिल किया, तो यह खतरा लगभग खत्म हो गया। यानी रिसर्च में दवा और ऑटिज्म के बीच कोई मजबूत या साफ संबंध नहीं मिला। रिसर्चर्स का कहना है कि कई बार मां का डिप्रेशन, पारिवारिक मानसिक स्वास्थ्य और जेनेटिक कारण भी बच्चे के न्यूरोडेवलपमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए केवल दवा को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा।

मनोचिकित्सक (Psychiatrist) का क्या है कहना?

मनोचिकित्सक डॉक्टर आदित्य सोनी का कहना है कि हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग होती है। अगर डिप्रेशन हल्का है, तो कई बार काउंसलिंग, थेरेपी, योग और लाइफस्टाइल बदलाव से मदद मिल सकती है। लेकिन अगर डिप्रेशन ज्यादा गंभीर है, तो दवा जरूरी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर के साथ मिलकर फायदे और जोखिम को समझना जरूरी है। अपनी मर्जी से दवा बंद करना या बदलना नुकसान पहुंचा सकता है।

गायनेकोलॉजिस्ट क्या कहते हैं?

गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर शैलजा के अनुसार, गर्भावस्था में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा अचानक बंद करना खतरनाक हो सकता है। अगर किसी महिला को गंभीर डिप्रेशन है और वह अचानक दवा छोड़ देती है, तो उसका असर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ सकता है।

इससे समय से पहले डिलीवरी, तनाव, नींद की कमी और मां-बच्चे के बीच बॉन्डिंग पर असर पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर ही तय करते हैं कि दवा जारी रखनी है या नहीं।

क्या करें प्रेग्नेंट महिलाएं?

अगर आप गर्भावस्था में डिप्रेशन की दवा ले रही हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। नई रिसर्च राहत जरूर देती है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि कोई भी फैसला अपने डॉक्टर की सलाह से ही लें। याद रखें, मां का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बच्चे की सेहत के लिए भी बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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