
Benign Fasciculation Syndrome: कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि जैसे हमारी स्किन के ठीक नीचे कोई छोटी सी मशीन या नस अपने आप फड़क रही हो कभी पिंडली (calf) में, कभी हाथ में तो कभी आंख या पैर के किसी हिस्से में। यह कंपन इतना हल्का होता है कि बाहर से शायद ही किसी को दिखे, लेकिन अंदर से यह अजीब सी बेचैनी जरूर पैदा कर देता है। अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है और डॉक्टर की रिपोर्ट्स बिल्कुल नॉर्मल आती हैं, तो मेडिकल भाषा में इसे बेनाइन फासिक्युलेशन सिंड्रोम (Benign Fasciculation Syndrome - BFS) कहा जाता है। इंटरनेट पर इस तरह की छोटी-मोटी फड़कन सर्च करते ही लोग अक्सर किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी का डर अपने मन में बैठा लेते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर यह BFS बला क्या है, क्यों होती है और इससे घबराने की कितनी जरूरत है।
हेल्थलाइन के मुताबिक, बेनाइन (Benign) का मतलब होता है जो बिल्कुल नुकसानदेह न हो। फासिक्युलेशन (Fasciculation) का मतलब है मांसपेशियों के छोटे रेशों (fibers) का अपने आप अनैच्छिक रूप से फड़कना या हिलना। इस सिंड्रोम में हमारे शरीर की मांसपेशियां (खासकर पैर, हाथ और पलकें) बिना किसी भारी शारीरिक मेहनत या चोट के अपने आप फड़कने लगती हैं। सबसे राहत की बात यह है कि यह बीमारी जानलेवा नहीं है और इससे मांसपेशियों की ताकत या काम करने की क्षमता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।
भले ही इसका सटीक कारण हमेशा पूरी तरह साफ न हो, लेकिन मेडिकल रिसर्च और क्लीनिकल अनुभव यह बताते हैं कि यह समस्या तब ज्यादा उभरती है जब शरीर अंदर से थका हुआ या तनाव में होता है;
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, BFS पूरी तरह से बेनाइन (हानिरहित) है, इसलिए ज्यादातर मामलों में यह जीवनशैली में थोड़ा सुधार करने से अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन अगर आपको फड़कन के साथ-साथ नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो इसे नजरअंदाज न करें और न्यूरोलॉजिस्ट से मिलें;
अगर आपकी मांसपेशियां भी इस तरह फड़कती हैं, तो घबराने की बजाय इन बातों का ध्यान रखें;
शरीर की हर छोटी हलचल कोई खतरनाक बीमारी नहीं होती। 'बेनाइन फासिक्युलेशन सिंड्रोम' इस बात का प्रमाण है कि कई बार हमारे शरीर को सिर्फ थोड़ा आराम, सही पोषण और मानसिक शांति की जरूरत होती है। अपनी जीवनशैली को संतुलित रखिए, बेव का डर मन से निकालिए और सेहतमंद रहिए।