Liver Health: CSIR की Phenome India स्टडी में खुलासा भारत में 40% लोग फैटी लिवर (MASLD) से प्रभावित। मोटापा, डायबिटीज बने बड़ी वजह।
Liver Health: भारत में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में The Lancet Regional Health Southeast Asia में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, देश में करीब 40 फीसदी लोग मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी (MASLD) से प्रभावित हो सकते हैं। यह एक चिंताजनक संकेत है, क्योंकि लंबे समय तक नजरअंदाज करने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
यह रिसर्च CSIR के Phenome India Health Cohort प्रोजेक्ट के तहत की गई। इसमें देश के 27 शहरों में स्थित 37 CSIR लैब्स से जुड़े 7,700 से ज्यादा वयस्कों को शामिल किया गया। अध्ययन में CSIR के मौजूदा कर्मचारी, रिटायर्ड लोग और उनके जीवनसाथी शामिल थे। इस प्रोजेक्ट का मकसद डायबिटीज, लिवर और दिल की बीमारियों से जुड़े जोखिमों को बेहतर तरीके से समझना है।
स्टडी के मुताबिक, कुल 10,267 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से 7,764 लोग रिसर्च के लिए चुने गए। इनमें 3,712 लोग MASLD की कैटेगरी में आए। उम्र के हिसाब से देखें तो लगभग 38.9 फीसदी लोग इस बीमारी से पीड़ित पाए गए। यानी हर तीन में से एक से ज्यादा व्यक्ति का लिवर फैटी हो चुका है।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि 60 साल से ऊपर के लोगों, डायबिटीज के मरीजों और बहुत ज्यादा मोटे लोगों (BMI 35–40) में लिवर से जुड़ी गंभीर समस्या ज्यादा देखी गई। कुल मिलाकर 2.4 फीसदी लोगों में गंभीर लिवर फाइब्रोसिस पाया गया, जो MASLD से पीड़ित लोगों में ज्यादा था।
अध्ययन के अनुसार, मोटापा MASLD का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ाते हैं। MASLD से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर (HbA1c) का स्तर और लिवर फाइब्रोसिस की संभावना ज्यादा पाई गई।
देश के अलग-अलग हिस्सों में MASLD की दर अलग रही। केरल के तिरुवनंतपुरम में करीब 27 फीसदी, जबकि उत्तराखंड के रुड़की और मध्य प्रदेश के भोपाल में लगभग 50 फीसदी लोग इससे प्रभावित पाए गए। दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में इसका स्तर मध्यम रहा।
शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में MASLD और लिवर फाइब्रोसिस की बढ़ती संख्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। समय रहते जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।