Blood Donation Ban News : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वो गे (Blood Donation ban on Gays) व अन्य पर रक्तदान बैन करने के फैसले को जारी रखेगा।
Blood Donation Ban News : सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को रक्तदान करने के मामले में सूचना दी है कि वो तीन लोगों के ब्लड डोनेशन बैन के फैसले पर कायम हैं। सरकार का कहना है कि विशेषज्ञों द्वारा अदालत के सुझाव पर पिछले निर्णय की समीक्षा करने के बाद ये फैसला लिया है। साथ ही भारत की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि विशेषज्ञों ने दोहराया है कि व्यापक जनहित में यह प्रतिबंध आवश्यक है।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया, उसमें ये साफ तौर पर कहा गया है कि ट्रांसजेंडर, समलैंगिक पुरुषों और यौन कर्मियों द्वारा रक्तदान पर लगे प्रतिबंध को बरकरार रखा जाएगा। यानी कि ये तीन प्रकार के लोग रक्तदान नहीं कर सकते हैं।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुला पंचोली की पीठ उन याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी, जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (NBTC) और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) द्वारा जारी "रक्तदाता चयन और रेफरल दिशानिर्देश, 2017" को चुनौती देती हैं। इन दिशानिर्देशों के खंड 12 और 51 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिक पुरुषों और महिला यौन कर्मियों को HIV/AIDS की उच्च-जोखिम वाली श्रेणी में मानते हैं और उन्हें रक्तदान करने से रोकते हैं।
2023 में दायर एक हलफनामे में केंद्र ने कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि ट्रांसजेंडर और समलैंगिक पुरुष HIV, हेपेटाइटिस B या C संक्रमण के जोखिम में हैं। यह मुद्दा व्यक्तिगत अधिकारों के बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
ये फैसला समानता, गरिमा और जीवन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों ने अपने नियम बदल दिए हैं। यह प्रतिबंध 1980 के दशक के पुराने और पक्षपाती विचारों पर आधारित है, जबकि अब चिकित्सा तकनीक में काफी सुधार हुआ है।