
Blood Donation Recovery: रक्तदान करने के बाद अक्सर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है क्या मेरे शरीर में खून की कमी नहीं हो जाएगी? कुछ लोग तो इसी डर की वजह से ब्लड डोनेट करने से बचते हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हमारा शरीर खून की कमी को पूरा करने की अद्भुत क्षमता रखता है।
रक्तदान के दौरान जितना खून निकाला जाता है, शरीर उसे धीरे-धीरे फिर से बनाने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। यही वजह है कि स्वस्थ लोगों के लिए रक्तदान को सुरक्षित माना जाता है।
जब आप ब्लड डोनेट करते हैं, तो शरीर से लगभग 450 से 500 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है। यह सुनने में ज्यादा लग सकता है, लेकिन यह एक स्वस्थ वयस्क के शरीर में मौजूद कुल रक्त का केवल एक छोटा हिस्सा होता है। रक्तदान के कुछ मिनट बाद ही शरीर खोए हुए तरल पदार्थ (Plasma) की भरपाई करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। यही कारण है कि डोनेशन के बाद पानी और अन्य तरल पदार्थ पीने की सलाह दी जाती है।
ब्रिटेन की NHS Blood and Transplant के अनुसार रक्तदान के बाद शरीर 24 से 48 घंटे के भीतर खोए हुए प्लाज्मा की काफी हद तक भरपाई कर लेता है। हालांकि खून सिर्फ प्लाज्मा से नहीं बना होता। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells), सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स भी शामिल होते हैं। इन कोशिकाओं को पूरी तरह वापस बनने में ज्यादा समय लगता है। लाल रक्त कोशिकाओं की भरपाई होने में आमतौर पर कुछ सप्ताह लग सकते हैं। यही वजह है कि रक्तदान के बीच एक निश्चित अंतराल रखा जाता है ताकि शरीर को रिकवरी का पूरा समय मिल सके।
कुछ लोगों को रक्तदान के तुरंत बाद हल्का चक्कर, थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है। Mayo Clinic और American Red Cross के अनुसार यह सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है और आमतौर पर थोड़े आराम, पानी और हल्के भोजन के बाद ठीक हो जाती है। हालांकि अगर व्यक्ति पर्याप्त पानी न पिए या खाली पेट रक्तदान करे, तो असहजता ज्यादा महसूस हो सकती है।
रक्तदान के बाद अस्थि मज्जा (Bone Marrow) अधिक सक्रिय हो जाती है। यही वह जगह है जहां नई रक्त कोशिकाएं बनती हैं। शरीर लगातार नई लाल रक्त कोशिकाएं तैयार करता है ताकि ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाया जा सके। यानी रक्तदान के बाद शरीर किसी खाली जगह के साथ नहीं रहता, बल्कि तुरंत उसकी भरपाई की प्रक्रिया शुरू कर देता है।
NHS Blood and Transplant और Red Cross कुछ आसान सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं:
यदि व्यक्ति निर्धारित अंतराल का पालन करता है और उसकी सेहत सामान्य है, तो नियमित रक्तदान सुरक्षित माना जाता है। यही कारण है कि दुनिया भर में लाखों लोग हर साल सुरक्षित रूप से रक्तदान करते हैं। रक्तदान के बाद शरीर कमजोर नहीं पड़ जाता, बल्कि वह खोए हुए रक्त की भरपाई के लिए तुरंत काम शुरू कर देता है। प्लाज्मा की भरपाई एक-दो दिन में होने लगती है, जबकि लाल रक्त कोशिकाओं को वापस बनने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर स्वस्थ लोगों को नियमित अंतराल पर रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।