स्वास्थ्य

Breast Milk Donation: जानकी पारेख ने किया 90 पैकेट ब्रेस्ट मिल्क डोनेट, जानिए नवजात बच्चों के लिए क्यों है यह जीवनदान

Breast Milk for Babies: जानकी पारेख द्वारा 90 पैकेट ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने के बाद फिर चर्चा में आया ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन। जानिए डॉक्टरों के अनुसार नवजात और प्रीमैच्योर बच्चों के लिए यह क्यों है जीवनदान।

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May 30, 2026
जानकी पारेख की फोटो (photo- insta @jank_ee)

Donor Human Milk: जानकी पारेख (सिंगर और एक्टर नकुल मेहता की पत्नी) का यह कदम सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि हमारे समाज में नवजात शिशुओं की सेहत से जुड़ा एक बेहद जरूरी मुद्दा है। आमतौर पर हमारे यहां ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन (मां के दूध का दान) को लेकर लोग खुलकर बात नहीं करते, लेकिन एक मीडिया संस्थान के साथ एक खास बातचीत में जानकी ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपने बेटे के जन्म के बाद करीब 90 पैकेट ब्रेस्ट मिल्क डोनेट किया था। उनका कहना है कि इसका मकसद कोई पब्लिसिटी पाना नहीं, बल्कि उन माताओं और बच्चों के बीच जागरूकता (Awareness) फैलाना था जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

आइए इस विषय को पूरी तरह से क्लिनिकल और हेल्थ के नजरिए से समझते हैं कि आखिर डॉक्टरों की नजर में यह डोनेशन बच्चों के लिए कितना बड़ा जीवनदान है।

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क्यों जरूरी है ब्रेस्ट मिल्क?

बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. सुगंध अग्रवाल बताती हैं कि जन्म के शुरुआती छह महीने तक बच्चे के लिए मां का दूध ही एकमात्र संपूर्ण आहार और अमृत माना जाता है। यह बच्चे को हर तरह के संक्रमण से बचाता है। लेकिन कई बार कुछ खास परिस्थितियों में जैसे समय से पहले डिलीवरी होना (Preterm Birth), मां की तबीयत ज्यादा खराब होना, या डिलीवरी के तुरंत बाद पर्याप्त दूध न बन पाना नवजात शिशुओं को अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता।

डॉ. सुगंध अग्रवाल के अनुसार, ऐसी स्थिति में ह्यूमन मिल्क बैंक (Human Milk Banks) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। जब जानकी जैसी माताएं अपना एक्स्ट्रा दूध डोनेट करती हैं, तो उसे पूरी तरह से जांचने के बाद सुरक्षित करके उन नवजात शिशुओं तक पहुंचाया जाता है जो अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) में भर्ती होते हैं।

बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाता है डोनेटेड मिल्क

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन पबमेड (PubMed - NCBI) के बाल रोग अध्ययनों के अनुसार, जो बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, उनमें नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस (NEC) नाम की पेट की एक गंभीर और जानलेवा बीमारी का खतरा बहुत ज्यादा होता है। रिसर्च बताती है कि डब्बे के दूध (Formula Milk) की तुलना में अगर इन बच्चों को डोनेट किया हुआ इंसानी दूध (Donor Human Milk) दिया जाए, तो इस जानलेवा बीमारी का खतरा 79% तक कम हो जाता है। मां का दूध बच्चे की आंतों को मजबूत करता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कई गुना बढ़ा देता है।

मिल्क डोनेशन को लेकर क्या सावधानियां हैं जरूरी?

डॉ. सुगंध अग्रवाल के मुताबिक, कोई भी महिला जो स्वस्थ है और अपने बच्चे की जरूरत से ज्यादा दूध का उत्पादन कर रही है, वह मिल्क बैंक में संपर्क कर सकती है। हालांकि, डोनेशन से पहले कुछ क्लिनिकल बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • स्वास्थ्य जांच: दूध दान करने वाली मां को एचआईवी, हेपेटाइटिस जैसी किसी भी संक्रामक बीमारी से मुक्त होना अनिवार्य है।
  • हाइजीन और स्टोरेज: दूध को पंप करते समय और पैकेट्स में स्टोर करते समय पूरी तरह से साफ-सफाई (Sterilization) का ध्यान रखा जाता है ताकि उसमें कोई बैक्टीरिया न पनपे।
  • दवाइयों का सेवन: यदि मां किसी गंभीर बीमारी की दवा ले रही है, तो डॉक्टरों की सलाह के बाद ही डोनेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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Published on:
30 May 2026 05:11 pm
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