
Cancer Detection Tests Hindi: जब भी कैंसर का नाम सामने आता है, तो अच्छे-अच्छे लोगों के पसीने छूट जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर से डरने की नहीं, बल्कि सही समय पर इसके बारे में जानने की जरूरत है। अगर कैंसर का पता शुरुआती स्टेज (शुरुआत) में ही चल जाए, तो इसका इलाज बहुत आसान हो जाता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसी शुरुआत में बीमारी को पकड़ने की प्रक्रिया को डॉक्टर कैंसर स्क्रीनिंग कहते हैं। आइए नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के आधार पर समझते हैं कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कैंसर का पता लगाने के लिए कौन से खास टेस्ट किए जाते हैं।
ब्रेस्ट कैंसर आर्गेनाईजेशन के अनुसार, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इसका समय पर पता लगाने के लिए मुख्य रूप से मैमोग्राम (Mammogram) किया जाता है। यह ब्रेस्ट का एक खास तरह का एक्स-रे होता है। डॉक्टरों के मुताबिक, जिन महिलाओं की उम्र 40 या 50 साल है, उन्हें हर 1 से 2 साल में एक बार यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए ताकि अगर कोई छोटी सी भी गांठ हो, तो उसका पता तुरंत चल सके।
यह भी महिलाओं से जुड़ा एक गंभीर कैंसर है, जिसे सही समय पर टेस्ट करवाकर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है इसके लिए पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट (Pap Smear & HPV Test) होता है, इस टेस्ट में डॉक्टर महिला के गर्भाशय ग्रीवा (cervix) से कुछ कोशिकाएं (cells) लेकर जांच करते हैं। यह टेस्ट यह बताता है कि आने वाले समय में कैंसर होने का कोई खतरा तो नहीं है। 21 से 65 साल की महिलाओं को नियमित रूप से यह टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।
यह कैंसर हमारी बड़ी आंत या मलाशय में होता है। 45 से 75 साल की उम्र के लोगों को इसके लिए सजग रहना चाहिए। इसके लिए कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) जिसमें एक पतली, लचीली ट्यूब जिसके आगे कैमरा लगा होता है, उसे आंत के अंदर डालकर जांच की जाती है। अगर आंत के अंदर कोई छोटी गांठ (पॉलीप) दिखती है, तो डॉक्टर उसे कैंसर बनने से पहले ही निकाल देते हैं। दूसरा स्टूल टेस्ट (Stool Tests), इसमें मोशन (मल) की जांच की जाती है कि कहीं उसमें खून के अंश तो नहीं आ रहे, जो कैंसर का इशारा हो सकते हैं।
लो-डोज सीटी स्कैन (LDCT)में जो लोग पिछले कई सालों से लगातार भारी स्मोकिंग कर रहे हैं और उनकी उम्र 50 से 80 साल के बीच है, उन्हें हर साल यह खास सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। इससे फेफड़ों की साफ तस्वीर सामने आ जाती है।
पीएसए टेस्ट (PSA Blood Test) के लिए बस खून का एक साधारण सैंपल लिया जाता है। खून में पीएसए का लेवल बढ़ने पर डॉक्टर आगे की जांच (जैसे बायोप्सी) की सलाह देते हैं। हालांकि, हर बार पीएसए बढ़ना कैंसर ही हो, ऐसा ज़रूरी नहीं है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।