
बार-बार गले में खराश क्यों होती है (photo- freepik)
Sore Throat Health Signs: मौसम बदलते ही गले में खराश या दर्द होना एक आम समस्या है। ज्यादातर लोग इसे सर्दी-जुकाम समझकर गर्म पानी, काढ़ा या दवा लेकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर गले का दर्द बार-बार हो रहा है, कई दिनों तक बना रहता है या इसके साथ बुखार, निगलने में परेशानी या गले में गांठ जैसी समस्या भी है, तो यह किसी दूसरी बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
Mayo Clinic, Cleveland Clinic और NHS के अनुसार, गले में दर्द (Sore Throat) केवल वायरल संक्रमण की वजह से ही नहीं होता, बल्कि बैक्टीरियल इंफेक्शन, एलर्जी, एसिड रिफ्लक्स और कुछ गंभीर बीमारियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
Mayo Clinic के अनुसार, गले में दर्द का सबसे आम कारण वायरल संक्रमण होता है। सर्दी, फ्लू, कोविड-19 या अन्य वायरल संक्रमण में गले में खराश, बुखार, नाक बहना और शरीर दर्द जैसे लक्षण साथ में दिखाई दे सकते हैं।
अगर गले में तेज दर्द के साथ तेज बुखार, टॉन्सिल पर सफेद धब्बे और निगलने में ज्यादा तकलीफ हो रही है, तो यह Strep Throat नाम के बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह से इलाज जरूरी होता है।
बार-बार गले में दर्द और टॉन्सिल में सूजन होना टॉन्सिलाइटिस की ओर इशारा कर सकता है। इसमें गले में दर्द के साथ मुंह खोलने और खाना निगलने में भी परेशानी हो सकती है।
धूल, धुआं, परागकण (Pollen) या पालतू जानवरों से एलर्जी होने पर भी गले में खुजली, खराश और दर्द महसूस हो सकता है। इसके साथ छींक, आंखों में पानी आना और नाक बहना भी हो सकता है।
Cleveland Clinic के अनुसार, पेट का एसिड बार-बार गले तक पहुंचने पर गले में जलन, खराश और सुबह उठते समय दर्द महसूस हो सकता है। इसे अक्सर लोग सामान्य गले की समस्या समझ लेते हैं।
Mayo Clinic के अनुसार, अगर गले का दर्द 3 सप्ताह से ज्यादा बना रहे, आवाज बैठ जाए, निगलने में लगातार परेशानी हो, गर्दन में गांठ महसूस हो या वजन तेजी से कम होने लगे, तो यह गले के कैंसर जैसे गंभीर कारण का संकेत भी हो सकता है। हालांकि, ऐसा हर मरीज में नहीं होता।
लगातार धूम्रपान, तंबाकू का सेवन या प्रदूषित वातावरण में रहने से भी गले में लंबे समय तक जलन और दर्द बना रह सकता है। इससे गले की अंदरूनी परत प्रभावित होती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
13 Jul 2026 12:16 pm
Published on:
13 Jul 2026 12:16 pm
