
Cardiomegaly Symptoms: हममें से कई लोग दिल की बीमारी को सिर्फ हार्ट अटैक से जोड़कर देखते हैं। लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं जो धीरे-धीरे विकसित होती हैं और लंबे समय तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं देतीं। ऐसी ही एक स्थिति है कार्डियोमेगाली (दिल का आकार बढ़ना), जिसे आम भाषा में दिल का बढ़ जाना या Enlarged Heart कहा जाता है।
अगर आपको सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी सांस फूलने लगी है, थोड़ी मेहनत में थकान महसूस होती है या पैरों में सूजन रहने लगी है, तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। Mayo Clinic के अनुसार ये बढ़े हुए दिल के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
कार्डियोमेगाली कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल का आकार सामान्य से बड़ा हो जाता है। यह अक्सर किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का परिणाम होता है। Mayo Clinic के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर, हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी, हार्ट वाल्व की बीमारी या कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी स्थितियां दिल को सामान्य से अधिक मेहनत करने पर मजबूर कर सकती हैं। समय के साथ दिल का आकार बढ़ सकता है।
American Heart Association (AHA) के अनुसार कार्डियोमायोपैथी जैसी स्थितियों में दिल की मांसपेशियां कमजोर या मोटी हो सकती हैं, जिससे दिल का आकार बढ़ सकता है।
शुरुआती चरण में कई लोगों को कोई लक्षण महसूस नहीं होते। लेकिन स्थिति बढ़ने पर ये संकेत दिखाई दे सकते हैं:
चलने, सीढ़ियां चढ़ने या हल्की गतिविधि के दौरान सांस फूलना।
रोजमर्रा के काम करने में भी थकान महसूस होना।
शरीर में तरल पदार्थ जमा होने की वजह से सूजन आ सकती है।
धड़कनों का अनियमित या तेज महसूस होना।
कुछ लोगों को कमजोरी या चक्कर भी महसूस हो सकते हैं।
NHS के अनुसार यदि बढ़े हुए दिल का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह हार्ट फेलियर जैसी गंभीर स्थिति का जोखिम बढ़ा सकता है। हार्ट फेलियर में दिल शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता।
अगर आपको लगातार सांस फूल रही है, सीने में दर्द होता है, पैरों में सूजन बनी रहती है या धड़कनें असामान्य महसूस होती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इन लक्षणों को उम्र बढ़ने या सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।