
Chadwick Sign Cause: महिला के प्रेग्नेंट होने का सबसे पहला और आम संकेत पीरियड मिस होना माना जाता है। लेकिन कई बार पीरियड मिस होने से पहले ही शरीर में कुछ ऐसे बदलाव होने लगते हैं जो शुरुआती गर्भावस्था की ओर इशारा करते हैं। इन्हीं में से एक बेहद दिलचस्प और मेडिकल रूप से महत्वपूर्ण संकेत है 'चैडविक साइन' (Chadwick Sign)। यह संकेत प्रेग्नेंसी के बेहद शुरुआती हफ्तों में ही महिलाओं के शरीर में दिखाई दे सकता है। आइए समझते हैं कि चैडविक साइन क्या होता है, यह क्यों दिखाई देता है और प्रेग्नेंसी की पहचान में इसका क्या योगदान है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिपोर्ट के मुताबिक, चैडविक साइन का मतलब है महिला के जननांगों (वजाइना, सर्विक्स और वुलवा) के रंग में बदलाव आना। जब कोई महिला प्रेग्नेंट होती है, तो उसके सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) और वजाइना की त्वचा का रंग हल्का नीला, बैंगनी या गहरा लाल-बैंगनी जैसा दिखने लगता है। आमतौर पर यह रंग में बदलाव कंसेप्शन (गर्भधारण) के करीब 6 से 8 हफ्ते बाद साफ नजर आने लगता है। कुछ महिलाओं में तो यह लक्षण 4 हफ्ते के भीतर भी देखा जा सकता है। अक्सर डॉक्टर पेल्विक जांच (शारीरिक परीक्षण) के दौरान इसे देखकर महिला के प्रेग्नेंट होने का अनुमान लगाते हैं।
वैरीवेल हेल्थ के अनुसार, गर्भाधान के तुरंत बाद महिला का शरीर होने वाले बच्चे के विकास के लिए तैयारियां शुरू कर देता है। इस दौरान पेल्विक एरिया (पेडू के हिस्से), गर्भाशय और वजाइना की तरफ ब्लड फ्लो (रक्त का बहाव) और खून की मात्रा अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जब इन नाजुक हिस्सों की रक्त वाहिकाओं में खून की मात्रा बढ़ती है, तो त्वचा के नीचे से नसें नीले या बैंगनी रंग की दिखाई देने लगती हैं। ठीक वैसे ही जैसे कई बार हाथ की नसों में खून ज्यादा होने पर वे बाहर से नीली दिखती हैं। डिलीवरी होने के बाद या प्रेग्नेंसी खत्म होते ही यह रंग अपने आप सामान्य हो जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, चैडविक साइन को 'गैर-विशिष्ट' (Non-specific) संकेत माना जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर यह रंग बदलाव दिख रहा है, तो प्रेग्नेंसी की संभावना काफी ज्यादा है, लेकिन यह शत-प्रतिशत पुष्टि नहीं करता। इसके साथ शरीर में कुछ और बदलाव भी दिखाई देते हैं;
1.गूडेल साइन (Goodell Sign)- शुरुआती हफ्तों में सर्विक्स की मांसपेशियां और ऊतक बहुत नरम होने लगते हैं।
2. हेगर साइन (Hegar Sign)- गर्भाशय का निचला हिस्सा (इस्थमस) बेहद मुलायम हो जाता है।
3. बार-बार पेशाब आना- हार्मोनल बदलाव और ब्लड फ्लो बढ़ने से बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है।
4. थकावट और सुस्ती- बिना ज्यादा काम किए भी शरीर में बहुत थकान महसूस होती है।
5. स्तनों में भारीपन- स्तनों में दर्द, कसावट और उनका आकार बढ़ना।
6. जी मिचलाना (Morning Sickness)- सुबह या दिन में किसी भी समय उल्टी जैसी फीलिंग होना।
जरूरी नहीं है कि अगर किसी के वजाइना या सर्विक्स का रंग नीला-बैंगनी दिख रहा है तो वह प्रेग्नेंट ही हो। कुछ अन्य मेडिकल स्थितियों में भी पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो बढ़ सकता है या ऐसा रंग दिख सकता है, जैसे;
चैडविक साइन प्रेग्नेंसी का एक प्राचीन और पारंपरिक जरिया जरूर रहा है, लेकिन आज के समय में केवल इसे देखकर फैसला नहीं लिया जाता। अगर आपको अपने शरीर में रंग बदलाव या अन्य लक्षण महसूस हो रहे हैं;