
कैंसर मरीज के DNA की जांच (NGS Testing) के जरिए इलाज (photo- freepik)
NGS Testing for Cancer: भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सिर्फ बीमारी का पता लगाना ही नहीं, बल्कि यह जानना भी जरूरी हो गया है कि किस मरीज पर कौन-सा इलाज सबसे ज्यादा असर करेगा। यही वजह है कि डॉक्टर अब नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (Next Generation Sequencing-NGS) जैसी आधुनिक जांच तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका के National Cancer Institute (NCI) और American Society of Clinical Oncology (ASCO) के अनुसार, NGS टेस्ट कैंसर मरीज के डीएनए में मौजूद बदलावों (Genetic Mutations) की पहचान करने में मदद करता है। इससे डॉक्टर बीमारी की प्रकृति को बेहतर तरीके से समझकर मरीज के लिए अधिक सटीक इलाज चुन सकते हैं।
NGS एक ऐसी आधुनिक जेनेटिक जांच है, जो एक साथ कई जीनों का विश्लेषण कर सकती है। इस जांच से यह पता लगाया जाता है कि कैंसर कोशिकाओं में कौन-कौन से आनुवंशिक बदलाव मौजूद हैं। National Cancer Institute के अनुसार, हर कैंसर एक जैसा नहीं होता। दो मरीजों को एक ही प्रकार का कैंसर होने के बावजूद उनके जीन में अलग-अलग बदलाव हो सकते हैं। इसलिए इलाज भी अलग हो सकता है।
NGS टेस्ट के लिए डॉक्टर मरीज के ट्यूमर के ऊतक (बायोप्सी), खून या कुछ मामलों में अन्य शरीर के नमूनों का उपयोग करते हैं। इसके बाद प्रयोगशाला में डीएनए का विश्लेषण किया जाता है और देखा जाता है कि कौन-से जीन में बदलाव मौजूद हैं।
American Society of Clinical Oncology (ASCO) के अनुसार, NGS टेस्टिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि डॉक्टर मरीज की रिपोर्ट के आधार पर ऐसा इलाज चुन सकते हैं, जो उसके कैंसर के लिए ज्यादा प्रभावी हो। इसके संभावित फायदे हैं, मरीज के लिए उपयुक्त दवा चुनने में मदद मिल सकती है। कुछ मामलों में अनावश्यक इलाज से बचा जा सकता है। टार्गेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक उपचार पद्धतियों के चयन में सहायता मिल सकती है। बीमारी की बेहतर समझ मिलने से इलाज की योजना अधिक व्यक्तिगत (Precision Medicine) बनाई जा सकती है। हालांकि, हर कैंसर मरीज को NGS टेस्ट की जरूरत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसका फैसला मरीज की बीमारी, कैंसर के प्रकार और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
National Comprehensive Cancer Network (NCCN) और ASCO के अनुसार, NGS टेस्ट कुछ खास प्रकार के कैंसर में अधिक उपयोगी माना जाता है, जैसे-
NGS हर मरीज के लिए समान रूप से उपयोगी नहीं होता। कई बार जांच में ऐसा कोई जीन परिवर्तन नहीं मिलता, जिसके आधार पर विशेष दवा चुनी जा सके। इसके अलावा यह जांच सामान्य ब्लड टेस्ट की तुलना में महंगी भी हो सकती है और हर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होती।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
30 Jun 2026 04:38 pm
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