स्वास्थ्य

तेज बुखार से लेकर दौरे तक, फिजिशियन से जानें Chandipura Virus क्या है, इसके क्या लक्षण होते हैं और ये बच्चों में ज्यादा क्यों फैलता है

Chandipura Virus Cause: मानसून में बच्चों को अचानक तेज बुखार और दौरे पड़ने से शुरू होता है चांदीपुरा वायरस। साइंसडायरेक्ट, WHO ( वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन), नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन और सरकारी अस्पताल के फिजिशियन से जानें इसके लक्षण और बचाव के आसान उपाय।
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Aug 08, 2026
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मानसून में बच्चों को अचानक तेज बुखार और दौरे पड़ने से शुरू हो सकता है चांदीपुरा वायरस- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- chatgpt)

Chandipura Virus History: मानसून के मौसम में मच्छर और कीड़े-मकोड़ों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इन दिनों चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) नाम की एक बीमारी चर्चा में है, जो बच्चों को तेजी से अपना शिकार बना रही है। इस वायरस का असर इतना खतरनाक होता है कि शुरुआत में मामूली सा दिखने वाला बुखार देखते ही देखते गंभीर रूप ले लेता है। साइंस डायरेक्ट (ScienceDirect) में छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वायरस दिमाग में सूजन पैदा कर देता है। आइए समझते हैं कि चांदीपुरा वायरस क्या है, यह कैसे फैलता है और इसके लक्षण दिखने पर माता-पिता को तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए साथ ही इस वायरस का इतिहास क्या रहा है।

चांदीपुरा वायरस क्या है और यह कैसे फैलता है?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, चांदीपुरा वायरस कोई नया वायरस नहीं है। पहली बार इसके मामले 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा नाम के गांव में पाए गए थे, जिसकी वजह से इसका नाम चांदीपुरा पड़ा। यह वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेत मक्खी / बालू मक्खी) के काटने से फैलता है। इसके अलावा यह कुछ खास तरह के मच्छरों और कीड़ों से भी फैल सकता है। सैंडफ्लाई अक्सर मिट्टी के कच्चे मकानों, दीवारों की दरारों, गोबर की जगहों और झाड़ियों में पनपती हैं। यह वायरस 15 साल से छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा निशाना बनाता है। बच्चों का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने की वजह से यह उन पर बहुत तेजी से हमला करता है।

WHO ( वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन) के अनुसार, चांदीपुरा वायरस (CHPV) रैबडोविरिडे नाम के वायरस परिवार का हिस्सा है। भारत के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में खासकर बारिश (मानसून) के मौसम में यह अचानक फैलता है और बच्चों में दिमाग की सूजन/बुखार (AES) की वजह बनता है। यह वायरस बहुत ही जानलेवा है। इससे पीड़ित लगभग 56% से 75% मरीजों की मौत का खतरा रहता है। इस बीमारी का अभी तक कोई पक्का टीका (वैक्सीन) या खास दवा नहीं बनी है।

इसके शुरुआती और गंभीर लक्षण क्या हैं?

चांदीपुरा वायरस के लक्षण बहुत तेजी से उभरते हैं। सुबह जो बच्चा बिल्कुल ठीक दिख रहा होता है, शाम तक उसकी हालत बिगड़ सकती है;

  • अचानक तेज बुखार आना।
  • उल्टी और सिरदर्द होना।
  • सुस्ती और चिड़चिड़ापन।
  • दौरे पड़ना (Seizures / Fits)।
  • बेहोशी या भ्रम।

यह वायरस दिमाग के लिए कितना खतरनाक है?

जब यह वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो यह सीधा सेंट्रल नर्वस सिस्टम (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) पर हमला करके दिमाग के ऊतकों में सूजन ला देता है। डॉक्टरी भाषा में इसे एंसेफलाइटिस (Encephalitis) कहा जाता है। अगर इस स्थिति में बच्चे को 24 से 48 घंटे के भीतर तुरंत सही मेडिकल इलाज न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकती है या शरीर के अंगों पर बुरा असर डाल सकती है।

बचाव के लिए माता-पिता क्या करें?

वर्तमान में चांदीपुरा वायरस के लिए कोई खास एंटीवायरल दवा या टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसका इलाज लक्षणों को संभालने (Symptomatic Care) और मरीज को तुरंत सपोर्टिव केयर (ICU सपोर्ट, ऑक्सीजन, फ्लूइड्स) देने पर निर्भर करता है। बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें;

  • बच्चों को पूरी आस्तीन (फुल कवर्ड) के कपड़े पहनाएं, ताकि मच्छर या रेत मक्खी न काट सकें।
  • मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • घर के आसपास सफाई रखें।
  • कच्ची जगहों की मरम्मत करें
  • मच्छर भगाने वाली क्रीम।

चंडीपुरा वायरस बच्चों में ज्यादा क्यों होता है

सरकारी अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर बाबूलाल वर्मा के अनुसार, छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम (शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र) पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। जब वायरस शरीर में आता है, तो बच्चों का शरीर वयस्कों (बड़ों) की तरह उससे तुरंत और मजबूती से लड़ नहीं पाता। हमारे शरीर में दिमाग की सुरक्षा के लिए एक नेचुरल शील्ड (ब्लड-ब्रेन बैरियर) होती है, जो इन्फेक्शन को दिमाग तक पहुंचने से रोकती है। बच्चों में यह सुरक्षा दीवार पूरी तरह मैच्योर नहीं होती। इसी वजह से चांदीपुरा वायरस बच्चों के खून में पहुंचते ही बहुत आसानी और तेजी से उनके दिमाग पर हमला कर देता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
08 Aug 2026 12:58 pm
Published on:
08 Aug 2026 12:00 pm