Chikungunya Vaccine: चिकनगुनिया से परेशान लोगों के लिए बड़ी उम्मीद! वैज्ञानिकों ने ऐसी वैक्सीन पर काम शुरू कर दिया है जो शरीर को पहले ही वायरस से लड़ना सिखा देगी। जानिए पूरी जानकारी।
Chikungunya Vaccine: ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक चिकनगुनिया से बचाने वाली वैक्सीन बनाने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है जो तेज बुखार के साथ-साथ जोड़ों में भयंकर दर्द पैदा करती है। कई लोगों में बुखार ठीक होने के बाद भी महीनों या सालों तक दर्द बना रहता है। यही वजह है कि दुनिया भर में इस बीमारी से बचाव को लेकर चिंता बढ़ रही है, खासकर उन इलाकों में जहां मच्छर ज्यादा होते हैं या जहां संक्रमित लोग यात्रा करके वायरस को नए क्षेत्रों तक पहुंचा देते हैं।
ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बर्न्ड रेहम और उनकी टीम ने वैक्सीन बनाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने E. coli बैक्टीरिया को एक छोटी फैक्ट्री की तरह इस्तेमाल किया। इन बैक्टीरिया की मदद से वैज्ञानिकों ने बेहद छोटे बायोपॉलिमर कण तैयार किए, जिनकी सतह पर चिकनगुनिया वायरस के एंटीजन लगाए गए।
सरल शब्दों में कहें तो ये कण वायरस जैसे दिखते हैं, लेकिन बीमारी नहीं फैलाते। जब ये शरीर में जाते हैं तो इम्यून सिस्टम इन्हें असली वायरस समझकर उससे लड़ने की तैयारी शुरू कर देता है। इससे शरीर पहले से ही वायरस को पहचानना और उससे मुकाबला करना सीख लेता है।
ये सिंथेटिक बायोपॉलिमर कण वायरस की बाहरी बनावट की नकल करते हैं। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सक्रिय हो जाती है और जरूरी इम्यून सेल इन कणों को पहचानकर उनसे लड़ने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। अगर बाद में असली वायरस शरीर में आए, तो इम्यून सिस्टम पहले से तैयार रहता है और तेजी से प्रतिक्रिया देता है।
चिकनगुनिया आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर के काटते ही वायरस खून में पहुंच जाता है और शरीर में फैलने लगता है। शुरुआत में तेज बुखार, ठंड लगना, कमजोरी, सिरदर्द, त्वचा पर चकत्ते और जोड़ों-मांसपेशियों में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायरस खासतौर पर जोड़ों, मांसपेशियों और कनेक्टिव टिश्यू को ज्यादा प्रभावित करता है। यही कारण है कि मरीजों को दर्द और जकड़न बहुत ज्यादा महसूस होती है। कुछ मामलों में यह नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई बार वायरस खत्म हो जाने के बाद भी शरीर का इम्यून सिस्टम जोड़ों पर हमला करता रहता है। करीब 60 प्रतिशत मरीजों को महीनों या सालों तक जोड़ों का दर्द बना रह सकता है। यह दर्द रुमेटॉइड आर्थराइटिस जैसा महसूस हो सकता है और रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना देता है।
शोध के शुरुआती नतीजे सकारात्मक रहे हैं। अब वैज्ञानिक इस वैक्सीन को क्लिनिकल ट्रायल के अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। पहले इसकी सुरक्षा की जांच होगी, फिर देखा जाएगा कि यह लोगों को संक्रमण से बचाने में कितनी प्रभावी है। अगर सब कुछ सफल रहा, तो आने वाले समय में चिकनगुनिया से बचाव के लिए एक असरदार वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है, जो लाखों लोगों को लंबे दर्द और तकलीफ से बचा सकती है।