
बैंड-एड लगाए हुए मरीज की प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)
Smart Wound Dressing: घाव में संक्रमण (वाउंड इंफेक्शन) होने पर डॉक्टर अक्सर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। लेकिन कई बार जरूरत न होने पर भी एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल हो जाता है, जिससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी दवाओं का असर कम होने की समस्या बढ़ रही है।
अब इस चुनौती से निपटने के लिए अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नई स्मार्ट ड्रेसिंग विकसित की है, जो एंटीबायोटिक केवल तभी छोड़ती है जब घाव में हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हों। यह रिसर्च हाल ही में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुई है। यह तकनीक भविष्य में घावों के इलाज का तरीका बदल सकती है।
शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रकार का स्मार्ट हाइड्रोजेल तैयार किया है, जिसे घाव पर पट्टी के नीचे लगाया जाता है। यह हाइड्रोजेल एंटीबायोटिक दवा को अपने अंदर सुरक्षित रखता है। जब घाव में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया पहुंचते हैं, तो वे बीटा-लैक्टामेज (Beta-Lactamase) नामक एंजाइम बनाते हैं।
जैसे ही यह एंजाइम हाइड्रोजेल के संपर्क में आता है, हाइड्रोजेल टूटने लगता है और उसमें मौजूद एंटीबायोटिक दवा बाहर निकलकर संक्रमण से लड़ना शुरू कर देती है। अगर घाव में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं हैं, तो दवा बाहर नहीं निकलती।
ब्राउन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और इस शोध की प्रमुख वैज्ञानिक अनीता शुक्ला के अनुसार, दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रही है। जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक इस्तेमाल करने से कई बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, जिन्हें आम भाषा में सुपरबग कहा जाता है। नई स्मार्ट ड्रेसिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एंटीबायोटिक का इस्तेमाल तभी करती है जब वास्तव में उसकी जरूरत हो। इससे शरीर के अच्छे बैक्टीरिया भी सुरक्षित रह सकते हैं और दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित होने का खतरा कम हो सकता है।
प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में यह हाइड्रोजेल केवल उन्हीं बैक्टीरिया की मौजूदगी में टूटा जो बीटा-लैक्टामेज एंजाइम बनाते हैं। वहीं सामान्य और नुकसान न पहुंचाने वाले बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर यह पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बना रहा। इसके अलावा चूहों पर किए गए अध्ययन में केवल एक बार इस ड्रेसिंग का इस्तेमाल करने से घाव में मौजूद बैक्टीरियल संक्रमण पूरी तरह खत्म हो गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह ड्रेसिंग वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली कई एंटीमाइक्रोबियल ड्रेसिंग्स की तुलना में संक्रमण खत्म करने और घाव भरने में बेहतर साबित हुई।
अगर आगे के क्लिनिकल ट्रायल्स में भी ऐसे ही नतीजे मिलते हैं, तो यह तकनीक घावों के इलाज को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकती है। खासकर डायबिटीज, सर्जरी या लंबे समय तक न भरने वाले घावों वाले मरीजों को इसका लाभ मिल सकता है। फिलहाल इस तकनीक का पेटेंट कराया जा चुका है और वैज्ञानिक इसे भविष्य में आम लोगों तक पहुंचाने के लिए आगे के विकास पर काम कर रहे हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
10 Jun 2026, 3:28 PM IST
Published on:
10 Jun 2026, 2:19 PM IST
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