
Chocolate Cyst Symptoms: महिलाओं में पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान थोड़ा-बहुत दर्द होना सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर यह दर्द हर महीने बर्दाश्त से बाहर हो जाए, पीठ और पेट के निचले हिस्से में तेज ऐंठन रहे या शादी के लंबे समय बाद भी प्रेग्नेंसी (गर्भवती होने) में लगातार दिक्कत आ रही हो, तो इसे आम कमजोरी समझने की भूल बिल्कुल न करें।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सारे लक्षण महिलाओं की ओवरी (अंडाशय) में होने वाली एक खास तरह की गांठ की वजह से हो सकते हैं, जिसे चॉकलेट सिस्ट (Chocolate Cyst) या ओवेरियन एंडोमेट्रियोमा (Ovarian Endometrioma) कहा जाता है. आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है और महिलाओं के लिए यह क्यों चिंता का विषय है।
नाम सुनकर भले ही यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसका चॉकलेट से कोई लेना-देना नहीं है. दरअसल, महिलाओं के गर्भाशय (uterus) के अंदर एक खास परत होती है जिसे एंडोमेट्रियम टिशू कहते हैं। जब यही टिशू किसी वजह से गर्भाशय से बाहर निकलकर ओवरी (अंडाशय) पर उगने लगते हैं, तो वहां धीरे-धीरे छोटे-छोटे पाउट या थैलियां (cysts) बन जाती हैं।
एनसीबीआइ के अनुसार, पीरियड्स के दौरान जब गर्भाशय से ब्लीडिंग होती है, तो इन गांठों के अंदर भी खून जमा होने लगता है. समय के साथ यह पुराना खून गाढ़ा और गहरे भूरे रंग का हो जाता है, जो बिल्कुल पिघली हुई चॉकलेट जैसा दिखता है. इसी वजह से डॉक्टर इसे 'चॉकलेट सिस्ट' कहते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, चॉकलेट सिस्ट महिलाओं की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर सीधा असर डालती है। यह ओवरी के अंदर अंडों (eggs) को बनने से रोक सकती है या उनकी क्वालिटी खराब कर सकती है। कई बार यह गांठ इतनी बड़ी हो जाती है कि यह फैलोपियन ट्यूब का रास्ता ब्लॉक कर देती है, जिससे अंडा और स्पर्म आपस में मिल नहीं पाते और महिला को मां बनने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
चॉकलेट सिस्ट का इलाज महिला की उम्र, उसके लक्षणों और इस बात पर निर्भर करता है कि वह आगे बच्चा चाहती है या नहीं;
1. दवाइयां और हार्मोन थेरेपी- अगर सिस्ट छोटी है, तो डॉक्टर दर्द कम करने और हार्मोन को कंट्रोल करने के लिए कुछ दवाइयां या गर्भनिरोधक गोलियां (Birth control pills) देते हैं, जिससे सिस्ट का बढ़ना रुक जाता है।
2. सर्जरी (Laparoscopy)- अगर सिस्ट का साइज बहुत बड़ा हो चुका है, दर्द असहनीय है या प्रेग्नेंसी में लगातार दिक्कत आ रही है, तो डॉक्टर दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपी) के जरिए बिना किसी बड़े चीरे के सिर्फ उस सिस्ट को बाहर निकाल देते हैं, जिससे ओवरी सुरक्षित रहती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।