
ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में बढ़े हुए CRP (C-Reactive Protein) स्तर (photo- freepik)
C-Reactive Protein Test: अगर आपने हाल ही में ब्लड टेस्ट कराया है और रिपोर्ट में CRP (C-Reactive Protein) का स्तर बढ़ा हुआ दिखा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कई लोग यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि कहीं उन्हें कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। लेकिन सच यह है कि CRP अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में कहीं सूजन (Inflammation) या संक्रमण (Infection) होने का संकेत देने वाला एक मार्कर है।
Mayo Clinic, MedlinePlus और Cleveland Clinic के अनुसार, डॉक्टर CRP टेस्ट इसलिए करवाते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि शरीर में सूजन कितनी है और उसकी वजह क्या हो सकती है।
CRP यानी सी-रिएक्टिव प्रोटीन एक ऐसा प्रोटीन है, जिसे लिवर बनाता है। जब शरीर में किसी कारण से सूजन या संक्रमण होता है, तो इसकी मात्रा खून में बढ़ने लगती है। MedlinePlus के अनुसार, CRP टेस्ट यह नहीं बताता कि बीमारी कौन-सी है, बल्कि यह संकेत देता है कि शरीर में कहीं सूजन मौजूद है। इसके बाद डॉक्टर अन्य जांच और मरीज के लक्षणों के आधार पर बीमारी का पता लगाते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से बुखार है, शरीर में सूजन है या किसी संक्रमण का संदेह है, तो डॉक्टर CRP टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। Mayo Clinic के मुताबिक, यह टेस्ट इन स्थितियों में उपयोगी हो सकता है-
कुछ लोगों में हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने के लिए High-Sensitivity CRP (hs-CRP) टेस्ट भी किया जाता है।
MedlinePlus और Mayo Clinic दोनों स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ CRP रिपोर्ट देखकर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। CRP सिर्फ यह बताता है कि शरीर में सूजन है। इसकी असली वजह जानने के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी जांचों को भी देखते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर कभी-कभी CBC, ESR, कल्चर टेस्ट या इमेजिंग जांच भी लिख सकते हैं।
सबसे पहले रिपोर्ट देखकर खुद दवा शुरू न करें। अगर आपको बुखार, तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, लगातार सूजन या अन्य लक्षण हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। इलाज हमेशा CRP को कम करने का नहीं, बल्कि उस कारण का किया जाता है जिससे CRP बढ़ा है। जब मूल बीमारी ठीक होने लगती है, तो CRP का स्तर भी सामान्य होने लगता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
30 Jun 2026 05:49 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
