
लिवर फंक्शन टेस्ट रिपोर्ट और ब्लड सैंपल की जांच को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)
Liver Function Test Meaning: जब डॉक्टर किसी व्यक्ति को बार-बार थकान, पेट में सूजन, भूख कम लगना या त्वचा और आंखों के पीले पड़ने जैसी समस्याओं के बाद कुछ ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, तो उनमें अक्सर एक जांच शामिल होती है, लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)। कई लोग यह नाम सुनते ही घबरा जाते हैं और सोचते हैं कि शायद उनका लिवर खराब हो गया है। लेकिन वास्तव में यह टेस्ट सिर्फ बीमारी पकड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि लिवर की कार्यक्षमता को समझने के लिए भी किया जाता है।
NIH, Mayo Clinic और Cleveland Clinic के अनुसार, लिवर फंक्शन टेस्ट खून की जांच का एक समूह है, जो यह पता लगाने में मदद करता है कि आपका लिवर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं।
लिवर फंक्शन टेस्ट कई अलग-अलग रक्त जांचों का समूह होता है। इन जांचों के जरिए खून में मौजूद कुछ एंजाइम, प्रोटीन और अन्य पदार्थों के स्तर को मापा जाता है। क्योंकि लिवर शरीर में भोजन को ऊर्जा में बदलने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और जरूरी प्रोटीन बनाने जैसे महत्वपूर्ण काम करता है, इसलिए उसकी कार्यक्षमता का आकलन करना जरूरी होता है।
यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर LFT कराने की सलाह दे सकते हैं:
कई बार यह जांच नियमित हेल्थ चेकअप का हिस्सा भी होती है।
एएलटी (ALT)- यह एंजाइम मुख्य रूप से लिवर में पाया जाता है। यदि इसका स्तर बढ़ा हुआ हो, तो यह लिवर कोशिकाओं के नुकसान का संकेत हो सकता है।
एएसटी (AST)- यह एंजाइम लिवर के अलावा हृदय और मांसपेशियों में भी पाया जाता है। इसका बढ़ना लिवर या अन्य ऊतकों की समस्या की ओर इशारा कर सकता है।
एएलपी (ALP)- यह जांच पित्त नलिकाओं और लिवर से जुड़ी समस्याओं की पहचान में मदद करती है।
बिलीरुबिन- बिलीरुबिन वह पदार्थ है जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है। इसका स्तर बढ़ने पर पीलिया हो सकता है।
एल्ब्यूमिन- यह एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है जो लिवर बनाता है। कम स्तर लिवर की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकता है।
Mayo Clinic के अनुसार, LFT लिवर की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है, लेकिन केवल इसी रिपोर्ट के आधार पर हर बीमारी का निदान नहीं किया जा सकता। यदि रिपोर्ट में कोई असामान्यता दिखाई देती है, तो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई या अन्य जांचों की सलाह भी दे सकते हैं।
NIH और Cleveland Clinic के अनुसार, LFT कई स्थितियों की पहचान में मदद कर सकता है:
कुछ मामलों में डॉक्टर जांच से पहले कुछ घंटों तक कुछ न खाने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि यह हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता। इसलिए जांच से पहले डॉक्टर या लैब द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।
NIH के अनुसार, लिवर फंक्शन टेस्ट लिवर की बीमारी का निदान करने, बीमारी की गंभीरता का आकलन करने और उपचार के प्रभाव की निगरानी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जांच डॉक्टरों को यह समझने में मदद करती है कि लिवर कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है और कहीं उसे नुकसान तो नहीं पहुंच रहा।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
25 Jun 2026 01:52 pm
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