
Chronic Cough Symptoms: खांसी होना एक बहुत ही आम बात है। मौसम बदलते ही या हल्का सर्दी-जुकाम होते ही खांसी आ जाना स्वाभाविक है। लेकिन क्या आपके साथ ऐसा होता है कि दिनभर तो खांसी ठीक रहती है, पर रात को बिस्तर पर लेटते ही अचानक बढ़ जाती है? या फिर आपकी खांसी हफ्तों तक ठीक ही नहीं हो रही? मेयो क्लिनिक के अनुसार, अगर बड़ों में खांसी 2 महीने (8 हफ्ते) या उससे ज्यादा समय तक रहे, और बच्चों में 1 महीने (4 हफ्ते) तक बनी रहे, तो इसे लगातार रहने वाली खांसी कहते हैं। यह सिर्फ एक सामान्य समस्या नहीं है। यह आपकी रात की नींद खराब कर देती है और आपको दिनभर थका देती है। बहुत ज्यादा और तेज खांसने से कभी-कभी उल्टी हो सकती है, चक्कर आ सकते हैं और यहां तक कि छाती की पसली पर भी असर पड़ सकता है। इसके सबसे मुख्य कारण बीड़ी-सिगरेट या तंबाकू पीना और अस्थमा (दमा) हैं। आइए जानते इसके क्या कारण और लक्षण हैं और कब आपको सावधान होना चाहिए।
1. गले में बलगम का जमा होना (Post-nasal Drip)- जब हमें जुकाम या एलर्जी होती है, तो नाक और साइनस में बलगम बनता है। दिन में खड़े या बैठे रहने पर यह आसानी से नीचे चला जाता है, लेकिन रात में लेटने पर यह बलगम सीधे गले के पीछे गिरने लगता है। इससे गले में खराश होती है और बार-बार खांसी आती है।
2. एसिड रिफ्लक्स या जीईआरडी (GERD)- कई लोगों को पेट में एसिड बनने की समस्या होती है। जब आप खाना खाकर सीधे लेट जाते हैं, तो पेट का एसिड वापस भोजन नली और गले तक आ जाता है। इससे गले में जलन होती है और रात को सूखी खांसी शुरू हो जाती है।
3. कमरे की सूखी हवा या धूल-मिट्टी- रात में कमरे की सूखी हवा या गद्दे और तकिए में मौजूद धूल-धक्कड़ (Dust Mites) से भी एलर्जी ट्रिगर हो सकती है, जिससे रातभर खांसी परेशान करती है।
एनएचएस के अनुसार, ज्यादातर खांसी सामान्य होती है, लेकिन अगर खांसी के साथ आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो इसे मामूली समझकर इग्नोर न करें;
मेयो क्लिनिक के अनुसार, अगर आपकी खांसी 3 हफ्ते से ज्यादा समय से बनी हुई है, दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, या आपको सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो खुद से कोई सिरप या एंटीबायोटिक लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर सही जांच करके कारण का पता लगाएंगे और सही इलाज देंगे।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।