
Color Blindness Cause: क्या आपको कभी लाल और हरे रंग में फर्क करने में उलझन हुई है? या फिर किसी कपड़े या फल का रंग चुनते समय समझ ही नहीं आया कि सही रंग कौन सा है? अगर ऐसा आपके या आपके किसी जानने वाले के साथ बार-बार होता है, तो यह सिर्फ एक आम भूल नहीं हो सकती। डॉक्टरी भाषा में इसे कलर ब्लाइंडनेस (Color Blindness) यानी वर्णांधता कहते हैं। कलर ब्लाइंडनेस का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि इंसान को सिर्फ काला और सफेद (Black and White) ही दिखता है, जैसा कि बहुत से लोग सोचते हैं। असल में, इस स्थिति से जूझ रहे इंसान को रंगों के बीच का अंतर समझ नहीं आता या कुछ खास रंग बहुत हल्के/बदले हुए नजर आते हैं। यह कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो छुआछूत से फैले या रातों-रात हो जाए, बल्कि यह आंखों की देखने की क्षमता से जुड़ा एक बदलाव है।
अमेरिकन अकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के मुताबिक, आंखों के पिछले हिस्से में एक पर्दा होता है जिसे रेटिना (Retina) कहते हैं। इस रेटिना में दो तरह की खास कोशिकाएं (Cells) होती हैं रॉड (Rods) और कोन (Cones)। रॉड कोशिकाएं हमें अंधेरे या कम रोशनी में देखने में मदद करती हैं, जबकि कोन कोशिकाएं रंगों की पहचान करती हैं। हमारी आंखों में तीन तरह के कोन होते हैं लाल, हरा और नीला। जब रोशनी आंख में जाती है, तो ये तीनों मिलकर दुनिया भर के लाखों रंग हमें दिखाते हैं। लेकिन जब इन तीनों में से कोई एक या दो कोन ठीक से काम नहीं करते, या पूरी तरह से अनुपस्थित होते हैं, तो दिमाग तक रंगों का सही सिग्नल नहीं पहुंच पाता। इसी स्थिति को कलर ब्लाइंडनेस कहा जाता है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण हर व्यक्ति में हल्के या गंभीर हो सकते हैं। आमतौर पर ये लक्षण देखने को मिलते हैं;
अगर कलर ब्लाइंडनेस जन्मजात (Genetic) है, तो फिलहाल इसका कोई पक्का इलाज या सर्जरी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, अगर यह किसी अन्य बीमारी या दवाई के साइड इफेक्ट की वजह से हुई है, तो मूल बीमारी का इलाज करने से इसमें सुधार हो सकता है। आजकल इस समस्या के साथ सामान्य जीवन जीने के लिए कई आधुनिक तरीके आ चुके हैं;
अगर आपको लगता है कि आपकी रंगों को पहचानने की क्षमता अचानक कम हो रही है या आपके बच्चे को रंगों की पहचान में बार-बार दिक्कत आ रही है, तो किसी आंखों के डॉक्टर (Ophthalmologist) से संपर्क करें। डॉक्टर इशिहारा कलर टेस्ट (Ishihara Test) जैसी आसान जांच करके मिनटों में यह बता देते हैं कि आंखों में कौन से रंग की पहचान कम हो रही है।