Summer Digestion Foods: गर्मियों में दही-चावल और खिचड़ी में कौन सा खाना पाचन के लिए बेहतर है? जानिए फायदे, सही समय और किसे क्या खाना चाहिए।
Curd Rice vs Khichdi: गर्मियों में अक्सर लोग कहते हैं कुछ भी खाओ, पेट भारी-भारी लगता है। इसकी वजह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि मौसम भी है। ज्यादा गर्मी में शरीर अपनी एनर्जी ठंडा रहने में लगाता है, जिससे पाचन (डाइजेशन) थोड़ा धीमा हो जाता है। ऐसे में भारी, तला-भुना खाना पेट पर बोझ डाल सकता है। यही कारण है कि इस मौसम में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना सबसे बेहतर माना जाता है जैसे दही-चावल और खिचड़ी।
तेज गर्मी में शरीर का मेटाबॉलिज्म थोड़ा धीमा हो जाता है। ऊपर से पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और भूख में कमी भी पाचन पर असर डालती है। यही वजह है कि कई लोगों को गैस, ब्लोटिंग या एसिडिटी की शिकायत होने लगती है।
दही-चावल एक ऐसा खाना है जो पेट को ठंडक देता है। इसमें मौजूद “प्रोबायोटिक्स” यानी अच्छे बैक्टीरिया, आंतों (गट) को मजबूत बनाते हैं। रिसर्च (Journal of Animal Health) के मुताबिक, दही का सेवन गट माइक्रोबायोटा को बेहतर बनाता है, जिससे पाचन सुधरता है। इससे पेट की जलन और एसिडिटी में राहत, शरीर को तुरंत एनर्जी, गर्मी में कूलिंग इफेक्ट के फायदे मिलते हैं। लेकिन ध्यान रखें अगर आपको लैक्टोज इंटॉलरेंस है या दही सूट नहीं करता, तो इसे सीमित मात्रा में ही लें।
खिचड़ी को कंफर्ट फूड यूं ही नहीं कहा जाता। चावल और दाल से बनी खिचड़ी पेट पर हल्की होती है और जल्दी पच जाती है।
एक स्टडी (International Journal of Rice) के अनुसार, खिचड़ी खासकर जब मिलेट्स या मूंग दाल से बनाई जाए, तो यह डाइजेशन के लिए और भी फायदेमंद होती है। इससे कम फैट और आसानी से पचने वाली, बीमार या कमजोर पाचन में सबसे बेहतर और जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज की जा सकती है।
गर्मियों में रात के समय हल्का खाना सबसे अच्छा रहता है। थोड़ी मात्रा में दही-चावल लिया जा सकता है, लेकिन ज्यादा मात्रा या ज्यादा तड़का पेट खराब कर सकता है। वहीं, खिचड़ी भी खा सकते हैं, लेकिन बहुत भारी या ज्यादा प्रोटीन वाली न लें।
डायटीशियन पालक नागपाल और न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल के अनुसार, गर्मियों में हल्का, कम मसालेदार और आसानी से पचने वाला खाना सबसे अच्छा रहता है और इस लिहाज से खिचड़ी एक सेफ ऑप्शन है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।