
Diabetes Complications: जब किसी को डायबिटीज (शुगर) होती है, तो अक्सर लोग सोचते हैं कि बस मीठा खाना बंद करना है और कहानी खत्म। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा, जिन्होंने हाल ही में रियलिटी शो लॉक अप 2 छोड़ दिया है, ने डायबिटीज, घबराहट (Anxiety) और मेनोपॉज के दौर से गुजरने के अपने मुश्किल अनुभवों को साझा किया है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो अकेले नहीं आती, बल्कि अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह शरीर की कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है। आइए मेयो क्लिनिक और नेशनल किडनी फाउंडेशन से समझते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को किन-किन समस्याओं के प्रति सावधान रहना चाहिए।
डायबिटीज के मरीजों में दिल की बीमारियों का खतरा आम लोगों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। जब खून में शुगर का लेवल लगातार बढ़ा रहता है, तो यह दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों को नुकसान होने लगता है। इससे नसों में चर्बी जमने लगती है और वे संकरी हो जाती हैं। नतीजा यह होता है कि मरीज को हाई ब्लड प्रेशर, सीने में दर्द और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
अक्सर लोग डायबिटीज को सिर्फ शारीरिक बीमारी मानते हैं, लेकिन इसका सीधा असर मानसिक सेहत पर भी पड़ता है। शुगर लेवल के बार-बार ऊपर-नीचे होने से शरीर में हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण मरीजों में बेवजह की घबराहट (Anxiety), चिड़चिड़ापन, और मानसिक तनाव देखने को मिलता है। कई बार बीमारी को हमेशा मैनेज करने की चिंता भी मरीज को अंदर ही अंदर परेशान करती है।
जिन महिलाओं को डायबिटीज होती है, उन्हें उम्र के एक पड़ाव पर आकर (जब पीरियड्स बंद होते हैं, जिसे मेनोपॉज कहते हैं) दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मेनोपॉज के दौरान शरीर में हॉर्मोन बदलते हैं, जिससे शुगर लेवल को कंट्रोल करना और मुश्किल हो जाता है। ऐसी महिलाओं में अचानक बहुत तेजी से गर्मी लगना (Hot Flashes), नींद न आना और मूड स्विंग्स होने की समस्या काफी बढ़ जाती है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन (Estrogen) हॉर्मोन के कम होने से महिलाओं में ब्लड शुगर लेवल अचानक बहुत अनप्रेडिक्टेबल (जिसका अंदाजा न लगाया जा सके) हो जाता है, जिससे डायबिटीज से जुड़ी अन्य जटिलताओं का खतरा और बढ़ जाता है।
लगातार बढ़ी हुई शुगर शरीर के फिल्टर यानी किडनी को बहुत नुकसान पहुंचाती है। अगर ध्यान न दिया जाए, तो धीरे-धीरे किडनी कमजोर होने लगती है और आगे चलकर किडनी फेलियर का खतरा बन जाता है। ठीक इसी तरह, डायबिटीज का असर आंखों की बारीक नसों पर भी पड़ता है, जिससे धुंधला दिखने लगता है और समय पर इलाज न मिलने से आंखों की रोशनी भी जा सकती है। National Kidney Foundation के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों को आगे चलकर किडनी से जुड़ी बीमारियां होने की संभावना रहती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।