Alcohol Mosquito Bite Research: क्या मच्छरों को शराब पीने वाले लोग ज्यादा पसंद आते हैं? हालिया वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि अल्कोहल का सेवन आपके शरीर को मच्छरों के लिए एक मैग्नेट बना सकता है। जानें इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण और बचाव के तरीके।
Mosquitoes and Alcohol: भारत में इन दिनों मौसम बदल रहा है और इसके साथ ही डेंगू और मलेरिया का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि एक ही जगह बैठे लोगों में से कुछ को मच्छर ज्यादा काटते हैं और कुछ को कम? अगर आप शाम को ड्रिंक या बीयर का आनंद ले रहे हैं, तो आप मच्छरों के लिए 'प्राइम टारगेट' हो सकते हैं। हालिया वैज्ञानिक शोध इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
National Library of Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, अल्कोहल का सेवन और मच्छरों (Blood-sucking insects and alcohol) के आकर्षण के बीच सीधा संबंध पाया गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि सिर्फ एक बोतल बीयर पीने के बाद भी व्यक्ति के पास मच्छरों की संख्या काफी बढ़ गई।
शरीर का तापमान (Body Temperature): शराब पीने के बाद हमारी रक्त वाहिकाएं फैलती हैं, जिससे शरीर का तापमान (Body Temperature changes) थोड़ा बढ़ जाता है। मच्छर 'थर्मो-रिसेप्टर्स' का उपयोग करके गर्म शरीर की ओर तेजी से आकर्षित होते हैं।
पसीने में बदलाव: शराब मेटाबोलाइज होने के बाद पसीने के जरिए बाहर निकलती है। इससे पसीने की गंध (Lactic Acid and Ammonia in sweat) बदल जाती है, जो मच्छरों के लिए किसी 'परफ्यूम' (Mosquito attractants) की तरह काम करती है।
भारत में शादियों और पार्टियों के सीजन में अक्सर आउटडोर इवेंट्स होते हैं। ऐसे में जहां एक तरफ मच्छरों का प्रजनन बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ओपन-एयर पार्टी में शराब का सेवन आपके रिस्क को डबल कर देता है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छर शाम के वक्त सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं, जो ठीक वही समय है जब लोग सोशल गैदरिंग्स में ड्रिंक्स लेते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, मच्छरों का आकर्षण सिर्फ गंध तक सीमित नहीं है। डॉ. एस. के. शर्मा (सीनियर फिजिशियन) बताते हैं, "जब कोई व्यक्ति अल्कोहल लेता है, तो उसके पसीने में अमोनिया और लैक्टिक एसिड जैसे रसायनों की मात्रा बढ़ जाती है। मच्छर कार्बन डाइऑक्साइड और इन विशेष रसायनों के मिश्रण को दूर से पहचान लेते हैं। ऐसे में शराब पीने वाला व्यक्ति मच्छरों के लिए एक 'मैग्नेट' की तरह काम करने लगता है।"
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।