स्वास्थ्य

एक प्लेट मोमोज की कीमत आपकी जान तो नहीं? जानिए कैसे ये आदत आपको चुपके से बना रही है Diabetes का मरीज

Fast Food and Diabetes Risk: घर के पास फास्ट फूड मिलने से मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। जानिए मोमोज-चाऊमीन क्यों बन रहे हैं सेहत का दुश्मन।

2 min read
Jan 20, 2026
Fast food and obesity risk (Photo- gemini ai)

Fast Food and Diabetes Risk: भागदौड़ भरी जिंदगी में फास्ट फूड हमारी रोज की आदत बनता जा रहा है। ऑफिस से लौटते वक्त, दोस्तों के साथ घूमते समय या अचानक भूख लगने पर लोग बिना ज्यादा सोचे मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा और बर्गर खा लेते हैं। स्वाद में ये चीजें भले ही बहुत अच्छी लगें, लेकिन सेहत के लिए धीरे-धीरे यही आदत नुकसानदेह साबित होती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि कभी-कभार खाने से क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि परेशानी सिर्फ खाने की नहीं, बल्कि फास्ट फूड की आसान उपलब्धता की भी है।

हाल ही में चेन्नई के कुछ इलाकों में की गई एक स्टडी में चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस रिसर्च के मुताबिक, जिन इलाकों में फास्ट फूड की दुकानें घर से करीब 400 मीटर के अंदर मौजूद हैं, वहां रहने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा ज्यादा पाया गया। वजह साफ है, जब बाहर का खाना हर समय पास में मिल जाए, तो घर का पौष्टिक खाना धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है।

ये भी पढ़ें

Diabetes Prevention: क्या 21 दिनों तक चीनी छोड़कर डायबिटीज हमेशा के लिए हो सकती है ठीक? डॉक्टर से जानिए अनोखा फॉर्मूला

रिसर्च में क्या सामने आया

रिसर्च के दौरान यह देखा गया कि जिन लोगों के घर के आसपास मोमोज, चाऊमीन और दूसरे स्ट्रीट फूड आसानी से मिल जाते हैं, वे बार-बार बाहर का खाना खाने लगते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि घर के बने संतुलित खाने की मात्रा कम हो जाती है। धीरे-धीरे शरीर में फैट जमा होने लगता है और वजन बढ़ने लगता है। लगातार तला-भुना और मैदे से बना खाना खाने से ब्लड शुगर का संतुलन भी बिगड़ने लगता है, जो आगे चलकर डायबिटीज का कारण बन सकता है।

मोमोज और चाऊमीन क्यों हैं नुकसानदेह

मोमोज और चाऊमीन स्वाद में भले ही पसंदीदा हों, लेकिन इनमें मैदा, रिफाइंड तेल और ज्यादा नमक होता है। मैदा तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाता है, जिससे शरीर को बार-बार इंसुलिन बनानी पड़ती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर इंसुलिन ठीक से काम नहीं करती और डायबिटीज की शुरुआत हो सकती है। वहीं ज्यादा तेल और नमक दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ाते हैं।

बच्चों और युवाओं पर ज्यादा असर

यह समस्या सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं है। स्कूल और कॉलेज के आसपास फास्ट फूड स्टॉल होने से बच्चे और युवा हफ्ते में कई बार बाहर का खाना खाने लगते हैं। कम उम्र में ज्यादा कैलोरी लेने से उनका वजन तेजी से बढ़ता है। इससे सुस्ती, जल्दी थकान और आगे चलकर डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। बचपन की ये गलत आदतें पूरी जिंदगी की सेहत बिगाड़ सकती हैं।

मानसिक सेहत पर भी असर

लगातार ऑयली और नमकीन खाना खाने से सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग भी प्रभावित होता है। ध्यान लगाने में दिक्कत, चिड़चिड़ापन और नींद की परेशानी बढ़ सकती है।

बचाव कैसे करें

इस खतरे से बचना मुश्किल नहीं है। मोमोज, चाऊमीन और बर्गर महीने में 1-2 बार तक सीमित रखें। घर का ताजा और संतुलित खाना खाएं। रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या हल्की एक्सरसाइज करें और पूरी नींद लें। फास्ट फूड की दुकान पास में होना सुविधाजनक जरूर लगता है, लेकिन यही सुविधा सेहत के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। समय रहते आदतें बदली जाएं, तो मोटापा और डायबिटीज जैसे रोगों से खुद को बचाया जा सकता है।

ये भी पढ़ें

Diabetes Risk: 2050 तक 90 करोड़ लोग होंगे डायबिटीज के शिकार! बच्चों पर भी खतरा, IDF रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Published on:
20 Jan 2026 03:44 pm
Also Read
View All

अगली खबर