स्वास्थ्य

Intermittent Fasting: हर 2-3 घंटे में खाना वजन घटाता है या बढ़ाता? आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?

क्या आप भी हर 2–3 घंटे में कुछ न कुछ खा लेते हैं? कई लोग मानते हैं कि इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वजन जल्दी घटता है। लेकिन मुंबई के एक डॉक्टर ने इस ट्रेंड को लेकर ऐसी बात कही है, जो आपकी डाइट सोच बदल सकती है।
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Feb 07, 2026
Intermittent Fasting
Intermittent Fasting (source: gemini)

Intermittent Fasting: अक्सर कहा जाता है कि बार-बार खाने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, लेकिन वजन घटाने में भोजन के समय से ज्यादा कैलोरी और क्वालिटी मायने रखती है। साथ ही, मुंबई के एक डॉक्टर से समझें कि इंटरमिटेंट फास्टिंग और बार-बार खाने के पैटर्न का आपके शरीर और भूख पर क्या असर पड़ता है।

मेटाबॉलिज्म कैसे तय होता है?

लोगों ने ये सोच बना ली है कि हर 2-3 घंटे में खाने से ब्लड शुगर स्थिर रहती है और मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे वजन घटता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मेटाबॉलिज्म इस बात से तय नहीं होता कि आप दिन में कितनी बार खाते हैं। यह देखा जाता है कि आप कुल कैलोरी कितनी ले रहे हैं, आपकी शारीरिक गतिविधि, हार्मोनल बैलेंस कैसा है। अगर कुल कैलोरी समान है, तो आप कितनी बार खाते हैं, इससे वजन पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

इंटरमिटेंट फास्टिंग पर क्या बोले डॉक्टर?

इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई जादुई तरीका नहीं है। यह इसलिए काम करता है क्योंकि इससे कुछ लोग कुल कैलोरी कम खा पाते हैं, न कि खाने के समय की वजह से। उन्होंने यह भी कहा कि व्यस्त दिनचर्या या कंसिस्टेंसी में दिक्कत झेल रहे लोगों के लिए यह तरीका लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होता।

बेहतर क्या है?

इतनी सारी डाइट सलाहों के बीच कन्फ्यूज होना लाजमी है। लेकिन डॉक्टर का साफ कहना है कि लंबे समय की सेहत और वजन कंट्रोल के लिए बैलेंस्ड डाइट सबसे भरोसेमंद तरीका है।

बार-बार खाने से शरीर में क्या होता है?

  • भूख से जुड़े हार्मोन लगातार एक्टिव रहते हैं।
  • मीठा खाने की क्रेविंग बढ़ सकती है।

वजन और सेहत के लिए क्या बेहतर है?

  • बैलेंस्ड भोजन लें
  • प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट शामिल करें
  • डाइट पैटर्न लंबे समय तक निभाएं

डाइट के लिए 5 जरूरी टिप्स

  • बार-बार खाना जरूरी नहीं
  • भूख लगे तभी खाएं
  • कैलोरी क्वालिटी पर ध्यान दें

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
07 Feb 2026 02:54 pm
Published on:
07 Feb 2026 02:54 pm