स्वास्थ्य

E coli in Drinking Water: रेलवे स्टेशन के पानी में Ecoli, जानिए सेहत को क्या नुकसान पहुंचाता है यह बैक्टीरिया

Railway Water E coli Contamination: रेलवे स्टेशन के पानी में मिला खतरनाक E. coli बैक्टीरिया! जानिए क्लीवलैंड क्लिनिक व सीडीसी (CDC) के अनुसार कैसे नुकसान पहुंचाता है और ये पानी में कैसे आता है।
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Aug 17, 2026
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रेलवे स्टेशन के पानी में मिला E. coli बैक्टीरिया- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

E coli Bacteria: CAG (Comptroller and Auditor General) की संसद में पेश की गई हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर्स और नलों के पानी के नमूनों में E. coli (एशरिशिया कोलाई) और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। यात्रा के दौरान अनजाने में दूषित पानी पीना आपकी सेहत के लिए कितना गंभीर और खतरनाक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं CAG रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है और सेहत को क्या नुकसान पहुंचाता है यह बैक्टीरिया साथ ही किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

CAG रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है?

CAG की पैसेंजर एमेनिटीज एंड सैनिटेशन एट नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशन्स रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षण किए गए 512 में से 458 स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता में भारी कमियां पाई गईं। कोयंबटूर, पालक्काड, हैदराबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर जैसे स्टेशनों पर वाटर कूलर्स के सैंपल E. coli पॉजिटिव पाए गए। कई राज्यों के दर्जनों स्टेशनों के नलों से लिए गए पानी के नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया।

E. coli क्या है और यह पीने के पानी में कैसे आता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, Escherichia coli (E. coli) एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो इंसानों और जानवरों की आंतों में पाया जाता है, पीने के पानी में E. coli का मिलना इस बात का सीधा संकेत है कि पानी का स्रोत मानव या पशु मल (fecal contamination) और सीवेज से दूषित हुआ है। वाटर टैंकों की सफाई न होना, पुरानी जर्जर पाइपलाइनों में लीकेज और जल जमाव इसके मुख्य कारण बनते हैं।

E. coli इन्फेक्शन शरीर पर क्या असर डालता है?

दूषित पानी पीने के 1 से 10 दिनों (आमतौर पर 3 से 4 दिनों) के भीतर इसके लक्षण सामने आने लगते हैं:

1.पेट में तेज ऐंठन और मरोड़ (Severe Stomach Cramps)- शरीर में प्रवेश करते ही यह बैक्टीरिया आंतों की अंदरूनी परत पर हमला करता है, जिससे पेट में बहुत तेज दर्द और मरोड़ शुरू हो जाती है।

2. दस्त और खूनी दस्त (Diarrhea & Bloody Stools)- शुरुआत में हल्का या पानी जैसा दस्त होता है। E. coli के कुछ खतरनाक स्ट्रेन (जैसे Shiga toxin-producing E. coli या STEC) ऐसे विषैले पदार्थ बनाते हैं जो आंतों की नलियों को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे मल के साथ खून आने लगता है।

3. उल्टी, बुखार और डिहाइड्रेशन (Vomiting & Dehydration)- लगातार दस्त और उल्टी के कारण शरीर का पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से खत्म होते हैं। इससे मरीज को चक्कर आना, अत्यधिक थकान और लो ब्लड प्रेशर महसूस हो सकता है।

4. किडनी खराब होने का खतरा (Hemolytic Uremic Syndrome - HUS)- यह E. coli इन्फेक्शन की सबसे जानलेवा स्थिति है। लगभग 5 से 10 प्रतिशत मरीजों (विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों) में यह बैक्टीरिया रेड ब्लड सेल्स को नष्ट कर देता है, जिससे किडनी फेलियर (Kidney Failure) का खतरा बन जाता है।

5. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)- दूषित पानी के उपयोग और अस्वच्छ वातावरण से यह बैक्टीरिया मूत्र मार्ग में प्रवेश कर गंभीर UTI और गुर्दे का इन्फेक्शन पैदा कर सकता है।

किन लोगों को इसका ज्यादा खतरा होता है?

सीडीसी के अनुसार, निम्नलिखित लोगों को इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है;

1.छोटे बच्चे (Young Children)- 5 साल से छोटे बच्चों की इम्युनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती है, जिससे उनमें E. coli संक्रमण का असर बहुत जल्दी और गंभीर होता है।

2. बुजुर्ग (Older Adults)- उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हो जाती है, जिससे बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा और जटिलताएं बढ़ जाती हैं।

3. कमजोर इम्युनिटी वाले लोग (People with Weak Immune Systems)- कैंसर मरीज (कीमोथेरेपी ले रहे), एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS) के मरीज, या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण दवाइियां लेने वाले लोगों का शरीर बैक्टीरिया से आसानी से नहीं लड़ पाता।

4. पेट में एसिड कम बनने की समस्या वाले लोग- जिन लोगों के पेट का एसिड स्तर कम होता है (या जो पेट में गैस/एसिडिटी कम करने की दवाएं नियमित लेते हैं), उनके पेट में E. coli बैक्टीरिया आसानी से जीवित रहकर आंतों तक पहुंच जाता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
17 Aug 2026 11:30 am
Published on:
17 Aug 2026 11:30 am