Electric shock: घर या दुकान में किसी को अचानक बिजली का करंट लग जाए, तो मरीज को हाथ लगाने से पहले कौन सी सावधानी रखनी चाहिए? जानिए उपजिला अस्पताल के डॉक्टर नवीन से वे जरूरी तरीके और प्राथमिक उपचार।
Electric shock First Aid Tips: इलेक्ट्रिक शॉक (Electric Shock) लगने पर मरीज को तुरंत पकड़ लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि करंट से बचाने वाले व्यक्ति को भी अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे मामलों में शुरुआती कुछ मिनट जान बचाने वाले साबित हो सकते हैं। उपजिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर नवीन (MD) से जानिए कि इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर सबसे पहले क्या कदम उठाना चाहिए, मरीज को छूने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है और तुरंत क्या प्राथमिक उपचार देना चाहिए जैसे आम सवालों के जवाब जो हर कोई जानना चाहता है?
जैसे ही आप किसी को करंट लगते हुए देखें, तो सबसे पहला काम यह करें कि तुरंत वहां का मेन स्विच या पावर सप्लाई बंद कर दें। अगर मेन स्विच दूर है या उसे बंद करना मुमकिन नहीं है, तो किसी सूखी लकड़ी, प्लास्टिक के डंडे या रबर की चटाई की मदद से मरीज को बिजली के तार या उपकरण से दूर करें। जब तक बिजली का कनेक्शन कट न जाए, तब तक खुद को सुरक्षित रखना ही आपका सबसे पहला कदम होना चाहिए।
यह सबसे जरूरी बात है जिसे अक्सर लोग भूल जाते हैं कि जब तक मरीज बिजली के संपर्क में है, उसे अपने खाली हाथों से छूने की गलती बिल्कुल न करें। ऐसा करने पर करंट आपके शरीर में भी आ सकता है। मरीज को हाथ लगाने से पहले यह पक्का कर लें कि आपके पैर सूखे हों और आपने पैरों में रबर या प्लास्टिक की चप्पल पहन रखी हो। किसी भी लोहे या गीली चीज का इस्तेमाल मरीज को हटाने के लिए न करें।
डॉक्टर नवीन बताते हैं कि मरीज को बिजली के स्रोत से सुरक्षित दूर करने के बाद सबसे पहले देखें कि मरीज होश में है या नहीं और वह सांस ले रहा है या नहीं। जहां करंट लगा है, वहां की त्वचा अक्सर जल जाती है। उस हिस्से को साफ और सूखे कपड़े से ढक दें। वहां कोई तेल या क्रीम तुरंत न लगाएं।
करंट शरीर में जहां से घुसता है और जहां से निकलता है (जैसे हाथ से घुसकर पैर से निकलना), उन दोनों जगहों पर चोट हो सकती है। बिजली का तेज झटका दिल की धड़कन को कम कर सकता है। अगर मरीज की सांस या धड़कन कम लगे, तो सीपीआर (CPR) देना आता हो तभी शुरू करें, वरना तुरंत आपातकालीन सहायता (Emergency Help) बुलाएं। झटका चाहे छोटा हो या बड़ा, अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर के पास ले जाएं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।