
Epiglottitis Symptoms: जब भी हमारे गले में दर्द होता है या कुछ निगलने में तकलीफ होती है, तो हम अक्सर इसे सामान्य खराश, टॉन्सिल या वायरल इन्फेक्शन मानकर टाल देते हैं। लेकिन अगर गले का दर्द इतना बढ़ जाए कि थूक निगलना भी भारी पड़ने लगे और साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत होने लगे, तो यह साधारण खराश नहीं है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को एपिग्लॉटाइटिस (Epiglottitis) कहा जाता है। यह एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अगर सही समय पर इसके लक्षणों को न पहचाना जाए, तो यह सांस की नली को पूरी तरह से बंद कर सकती है। आइए समझते हैं कि एपिग्लॉटाइटिस क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इसमें तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए।
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, हमारे गले के अंदर, जीभ के ठीक पीछे एक छोटा सा ढक्कन जैसा कार्टिलेज (लचीली हड्डी) होता है, जिसे एपिग्लॉटिस (Epiglottis) कहा जाता है। इसका मुख्य काम यह होता है कि जब हम कुछ खाते या पीते हैं, तो यह सांस की नली को ढंक देता है ताकि खाना या पानी फेफड़ों में न चला जाए। जब इस एपिग्लॉटिस में किसी संक्रमण या चोट के कारण सूजन (Inflammation) आ जाती है, तो इसे ही एपिग्लॉटाइटिस कहते हैं। सूजन के कारण यह ढक्कन मोटा हो जाता है और सांस की नली (Windpipe) का रास्ता रोकने लगता है, जिससे हवा फेफड़ों तक सही से नहीं पहुंच पाती।
क्लीवलैंड क्लिनिक का कहना है कि एपिग्लॉटाइटिस के लक्षण बहुत तेजी से उभरते हैं। बच्चों और बड़ों दोनों में इसके संकेत काफी गंभीर हो सकते हैं;
एपिग्लॉटाइटिस होने की सबसे मुख्य वजह एक खास तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है, जिसे हाइमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (Hib) बैक्टीरिया कहते हैं। यह बैक्टीरिया छींकने, खांसने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। इसके अलावा, अन्य प्रकार के बैक्टीरिया या वायरस, बहुत गर्म पेय पदार्थ पीने से गले का जलना, या फिर गले पर किसी तरह की चोट लगने से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है।
अगर आपको या आपके घर में किसी को यह समस्या लग रही है, तो यह एक बेहद नाजुक समय होता है। ऐसे में कुछ खास बातों का ध्यान रखें;
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर सबसे पहले मरीज के सांस लेने के रास्ते को सुरक्षित करते हैं। मरीज को ऑक्सीजन मास्क दिया जाता है या अगर नली बहुत सिकुड़ गई हो तो मुंह के रास्ते एक सांस की ट्यूब (Intubation) डाली जाती है। इन्फेक्शन को खत्म करने के लिए नसों के जरिए (IV Drip) एंटीबायोटिक और सूजन कम करने वाली दवाइयां दी जाती हैं।