
Fabry Disease Cause: क्या आपने कभी सोचा है कि त्वचा पर दिखाई देने वाले छोटे-छोटे लाल या बैंगनी दाने सिर्फ कोई सामान्य एलर्जी न होकर किसी गंभीर बीमारी का इशारा हो सकते हैं? इसके साथ ही अगर किसी व्यक्ति को बहुत कम पसीना आता है या गर्मी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती, तो यह एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति का संकेत हो सकता है। इस बीमारी को फैब्री डिजीज (Fabry Disease) कहा जाता है। यह एक ऐसी आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है जो शरीर के कई प्रमुख अंगों को धीरे-धीरे प्रभावित करती है। आइए जानते हैं कि फैब्री डिजीज आखिर क्या है, यह क्यों होती है और इसके क्या लक्षण हैं।
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NCBI) के मुताबिक, हमारा शरीर कई तरह के एंजाइम्स (Enzymes) बनाता है, जो शरीर के अंदर मौजूद केमिकल और फैट को तोड़ने का काम करते हैं। फैब्री डिजीज से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में अल्फा-गालाक्टोसिडेस ए (Alpha-galactosidase A) नाम के एंजाइम की कमी हो जाती है या यह एंजाइम सही से काम नहीं करता।
जब यह एंजाइम अपना काम नहीं कर पाता, तो ग्लोबोट्रियाओसिलसेरामाइड (Gb3) नाम का एक खास तरह का फैट या वसा शरीर की कोशिकाओं (Cells) में जमा होने लगता है। समय के साथ यह फैट हमारी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) और नसों में जमा होकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जीन्स के जरिए फैलती है, इसलिए इसे जेनेटिक या आनुवंशिक बीमारी कहा जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, फैब्री डिजीज के लक्षण बचपन या किशोरावस्था में ही दिखने शुरू हो जाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके प्रमुख लक्षण नीचे दिए गए हैं;
अगर सही समय पर फैब्री डिजीज की पहचान और इलाज न किया जाए, तो जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जमा हुआ फैट शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है;
अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर ब्लड टेस्ट के जरिए शरीर में एंजाइम के स्तर की जांच करते हैं। इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट (DNA Test) करवाकर इस बीमारी की पक्की पुष्टि की जाती है। फैब्री डिजीज को जड़ से खत्म करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस की मदद से इसे बहुत हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें मरीज को ड्रिप के जरिए बाहर से वह एंजाइम दिया जाता है, जिसकी शरीर में कमी होती है। शैपेरॉन थेरेपी (Chaperone Therapy) मौखिक दवा (ओरल पिल) के रूप में दी जाती है जो शरीर के खराब एंजाइम को सही तरीके से काम करने में मदद करती है।हाथ-पैरों के दर्द को कम करने के लिए दर्द निवारक दवाएं और किडनी या दिल की सुरक्षा के लिए अलग से दवाएं दी जाती हैं।
अगर आपके या आपके बच्चे के शरीर पर बिना किसी वजह के छोटे लाल-बैंगनी दाने दिख रहे हैं, गर्मी में बिल्कुल पसीना नहीं आता या हाथ-पैरों में लगातार जलन और दर्द रहता है, तो बिना देर किए डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर सही डायग्नोसिस होने से दिल और किडनी को होने वाले बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।