H3N2 Flu Virus: अमेरिका में फ्लू का नया H3N2 सब-क्लेड K तेजी से फैल रहा है। जानिए इसके लक्षण, खतरा, वैक्सीन की असरदारता और बचाव के तरीके।
H3N2 Flu Virus: इस सर्दी अमेरिका में फ्लू ने चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टर और हेल्थ एजेंसियां लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। जनवरी की शुरुआत तक फ्लू के कारण 1 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, हालात और गंभीर हो सकते हैं।
अमेरिकी एजेंसी CDC के अनुसार, इस फ्लू सीजन में अब तक करीब 1 करोड़ 10 लाख लोग बीमार पड़ चुके हैं और करीब 5 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। दिसंबर के बाद मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
इस बार परेशानी की बड़ी वजह इन्फ्लुएंजा A का बदला हुआ रूप है, जिसे H3N2 सब-क्लेड K कहा जा रहा है। इस वायरस में करीब 10 जेनेटिक बदलाव हुए हैं। आम तौर पर फ्लू वायरस हर साल थोड़ा बदलता है, लेकिन इस बार बदलाव ज्यादा हैं, जिससे शरीर की पुरानी इम्यूनिटी इसे ठीक से पहचान नहीं पा रही।
इस वायरस की सतह पर मौजूद प्रोटीन में बदलाव हुए हैं। यही प्रोटीन हमारे शरीर की इम्यूनिटी और वैक्सीन का मुख्य निशाना होता है। बदलाव के कारण एंटीबॉडी इसे पकड़ने में कमजोर पड़ जाती हैं। वायरस अपने ऊपर शुगर की एक परत भी बना लेता है, जिससे वह और ज्यादा छिप जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस ज्यादा जानलेवा नहीं है, लेकिन बहुत तेजी से फैलता है। जिन लोगों में पूरी इम्यूनिटी नहीं है, वे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं। इसी वजह से यूरोप और अमेरिका में फ्लू सीजन इस बार जल्दी शुरू हुआ और केस तेजी से बढ़े।
इस साल की फ्लू वैक्सीन पूरी तरह संक्रमण को नहीं रोक पा रही, लेकिन गंभीर बीमारी से बचाने में मदद कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चों में यह अस्पताल में भर्ती होने से अच्छी सुरक्षा देती है, जबकि वयस्कों में भी यह गंभीर हालत से बचाव करती है।
इस बार फ्लू वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या पिछले सालों के मुकाबले कम है। कम वैक्सीनेशन का मतलब है कि वायरस को फैलने के ज्यादा मौके मिल रहे हैं, जिससे बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को ज्यादा खतरा है।
डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू से बचने के लिए वैक्सीन लगवाना, समय पर इलाज कराना और जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवाएं लेना जरूरी है। फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं है कि यह नया स्ट्रेन दवाओं के खिलाफ असरदार नहीं है।