Excess Salt Intake: क्या आप भी खाने में ऊपर से नमक डालते हैं? एमडी फिजिशियन डॉ. संदीप जोशी से जानिए कैसे ज्यादा नमक हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है।
Salt Side Effects: हम में से कई लोग खाने की प्लेट सामने आते ही बिना चखे ऊपर से नमक छिड़क देते हैं। दाल हो, सलाद हो या फिर फल कुछ लोगों को हर चीज में एक्स्ट्रा नमक चाहिए होता है। देखने में ये आदत छोटी लगती है, लेकिन यही छोटी गलती धीरे-धीरे दिल की सेहत पर भारी पड़ सकती है।
डॉ. संदीप जोशी, एमडी फिजिशियन ने पत्रिका के साथ बातचीत में बताया, “ज्यादा नमक खाना शरीर और खासकर दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है। कई लोग बिना सोचे-समझे ऊपर से नमक डालते रहते हैं, जबकि उन्हें अंदाजा भी नहीं होता कि ये आदत धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही है।”
डॉ. जोशी बताते हैं कि हमारे शरीर को बहुत कम मात्रा में नमक की जरूरत होती है, लेकिन ज्यादातर लोग जरूरत से कहीं ज्यादा नमक खा रहे हैं। घर का खाना, अचार, पापड़, नमकीन, चिप्स, इंस्टेंट फूड और ऊपर से डाला गया अतिरिक्त नमक मिलकर शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा देते हैं।
जब शरीर में ज्यादा सोडियम पहुंचता है, तो शरीर पानी रोकने लगता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर धमनियां सख्त होने लगती हैं और दिल की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं। यही वजह है कि ज्यादा नमक हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है।
National Institutes of Health की रिसर्च में भी बताया गया है कि जरूरत से ज्यादा नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा तेजी से बढ़ता है। रिसर्च के अनुसार, लंबे समय तक अधिक सोडियम लेने से दिल और ब्लड वेसल्स पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे हार्ट डिजीज की संभावना बढ़ सकती है।
सबसे बड़ी परेशानी ये है कि शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते। नुकसान धीरे-धीरे अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। हालांकि कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. जोशी कहते हैं कि नमक कम करने का मतलब फीका खाना खाना नहीं है। हमारी स्वाद की आदतें कुछ समय में बदल सकती हैं। खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू, लहसुन, हरी धनिया और दूसरे मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
डॉ. जोशी के मुताबिक नमक ज्यादा खाने की आदत कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक व्यवहार है जिसे धीरे-धीरे बदला जा सकता है। सही समय पर सावधानी बरतकर दिल की कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।