
Heart Attack in Young Age: आज के समय में ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि जो व्यक्ति फिट दिखता है, रोज जिम जाता है, दौड़ लगाता है और बाहर से बिल्कुल हेल्दी नजर आता है, उसे दिल की बीमारी नहीं हो सकती। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। कम उम्र के कई फिट और एक्टिव लोगों में भी अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले सामने आ रहे हैं।
डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल गोरखपुर में तैनात कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर रोहित गुप्ता ने पत्रिका के साथ बातचीत में बताया, “सिर्फ शरीर से फिट दिखना ही अच्छी सेहत की गारंटी नहीं है। दिल की बीमारी कई बार अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है और लोगों को पता भी नहीं चलता।”
डॉक्टर गुप्ता बताते हैं कि आजकल युवाओं में स्ट्रेस बहुत ज्यादा बढ़ गया है। देर रात तक काम करना, नींद पूरी न होना, मोबाइल और लैपटॉप पर घंटों समय बिताना, करियर का दबाव और मानसिक थकान दिल पर बुरा असर डाल रहे हैं।
लगातार तनाव रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, हार्मोन गड़बड़ होते हैं और शरीर में सूजन बढ़ने लगती है, जिससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
कई लोग बिना मेडिकल जांच के बहुत ज्यादा भारी वर्कआउट करने लगते हैं। घंटों जिम में पसीना बहाना या अचानक बहुत ज्यादा रनिंग करना दिल पर दबाव डाल सकता है। अगर किसी को पहले से कोई छिपी हुई हार्ट समस्या हो, तो ज्यादा एक्सरसाइज कार्डियक अरेस्ट का कारण भी बन सकती है।
एक व्यक्ति बाहर से पूरी तरह फिट दिख सकता है, लेकिन उसके शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लॉकेज या हार्ट से जुड़ी आनुवंशिक समस्या हो सकती है। अगर परिवार में पहले किसी को दिल की बीमारी रही है, तो कम उम्र में भी खतरा बढ़ सकता है। इसलिए फैमिली हिस्ट्री को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
आजकल फिटनेस के नाम पर लोग हाई-प्रोटीन डाइट, एनर्जी ड्रिंक, ज्यादा सप्लीमेंट्स और कई बार स्टेरॉयड तक लेने लगते हैं। इसके अलावा सोशल स्मोकिंग, वेपिंग, डिहाइड्रेशन और अनियमित खानपान भी दिल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बाहर से फिट दिखने वाले कई लोग अंदर से हार्ट पर लगातार दबाव डाल रहे होते हैं।
कम उम्र के लोग अक्सर सोचते हैं कि उन्हें हार्ट की बीमारी नहीं हो सकती, इसलिए वे नियमित जांच नहीं कराते। डॉक्टर के मुताबिक, 20-30 साल की उम्र में भी ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट चेकअप कराना जरूरी है, खासकर अगर परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास हो।
वो ये भी कहते हैं कि असली फिटनेस सिर्फ सिक्स पैक या पतले शरीर से नहीं होती। अच्छी नींद, संतुलित खाना, मानसिक शांति, सही एक्सरसाइज और नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी है। क्योंकि कई बार शरीर फिट दिखता है, लेकिन दिल अंदर ही अंदर खतरे के संकेत दे रहा होता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।