27 जून 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मानसून में वायरल समझकर न करें नजरअंदाज, WHO से जानिए Typhoid के लक्षण

Typhoid Causes: मानसून में लगातार बुखार, पेट दर्द और कमजोरी को वायरल समझकर नजरअंदाज न करें। WHO, NHS और Cleveland Clinic के अनुसार जानिए टाइफाइड के लक्षण, कारण, बचाव और इलाज।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

Jun 27, 2026

Typhoid, Typhoid Fever, Monsoon Diseases, Bacterial Infection,

मानसून में टाइफाइड के लक्षण और बचाव को दर्शाती हेल्थ तस्वीर (photo- freepik)

Typhoid Symptoms: बारिश का मौसम आते ही बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी शिकायतें बढ़ने लगती हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग हर बुखार को वायरल फीवर समझकर घर पर ही दवा लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर बुखार लगातार कई दिनों तक बना रहे, भूख कम लगने लगे, पेट दर्द हो या कमजोरी बढ़ती जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह टाइफाइड (Typhoid) का संकेत भी हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, टाइफाइड एक गंभीर जीवाणु (बैक्टीरिया) जनित संक्रमण है, जो दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है। मानसून के दौरान पानी के दूषित होने और बाहर का असुरक्षित भोजन खाने का जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए इस मौसम में टाइफाइड का खतरा भी बढ़ सकता है।

टाइफाइड क्या है?

Cleveland Clinic के अनुसार टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह बैक्टीरिया संक्रमित व्यक्ति के मल के जरिए भोजन या पानी को दूषित कर सकता है। जब कोई व्यक्ति ऐसा खाना या पानी लेता है, तो संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है।

मानसून में टाइफाइड का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

बारिश के मौसम में कई जगहों पर पीने का पानी दूषित हो सकता है। सड़क किनारे मिलने वाला खाना, कटी हुई फल-सब्जियां या साफ-सफाई का ध्यान न रखने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं। WHO के अनुसार, जहां स्वच्छ पानी और अच्छी स्वच्छता व्यवस्था की कमी होती है, वहां टाइफाइड का खतरा अधिक रहता है।

टाइफाइड के शुरुआती लक्षण

  1. कई दिनों तक लगातार तेज बुखार- टाइफाइड का सबसे प्रमुख लक्षण धीरे-धीरे बढ़ने वाला और लगातार बना रहने वाला बुखार है।
  2. सिरदर्द और कमजोरी- शरीर में थकान, कमजोरी और सिरदर्द महसूस हो सकता है।
  3. पेट दर्द- कई मरीजों को पेट में दर्द या असहजता महसूस होती है।
  4. भूख कम लगना- भूख कम होना भी शुरुआती संकेतों में शामिल है।
  5. कब्ज या दस्त- कुछ लोगों को कब्ज होती है, जबकि कुछ में दस्त की शिकायत हो सकती है।
  6. मतली या उल्टी- कुछ मरीजों को जी मिचलाना या उल्टी भी हो सकती है।
  7. त्वचा पर हल्के गुलाबी दाने- Cleveland Clinic के अनुसार, कुछ लोगों के सीने या पेट पर हल्के गुलाबी रंग के छोटे दाने (Rose Spots) दिखाई दे सकते हैं, हालांकि यह हर मरीज में नहीं होते।

वायरल बुखार और टाइफाइड में क्या अंतर है?

वायरल बुखार आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक होने लगता है। लेकिन यदि बुखार लगातार बना रहे, कमजोरी बढ़ती जाए और पेट से जुड़ी समस्याएं भी होने लगें, तो डॉक्टर टाइफाइड की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

डॉक्टर से तुरंत कब मिलें?

अगर बुखार तीन से पांच दिनों से ज्यादा बना रहे या शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने लगे, तो इसे मामूली थकान समझकर बैठने की गलती न करें। इसके अलावा, अगर पेट में लगातार तेज दर्द हो, बार-बार उल्टी आए या स्थिति इतनी बिगड़ जाए कि पानी पीना भी मुश्किल लग रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं, मरीज को बहुत ज्यादा सुस्ती छाने लगे, भ्रम की स्थिति बने या बेहोशी महसूस हो, तो बिल्कुल भी देरी न करें। टाइफाइड में अगर समय पर सही इलाज न मिले, तो यह आंतों में छेद (perforation) और अंदरूनी ब्लीडिंग जैसी जानलेवा जटिलताओं की वजह बन सकता है।

टाइफाइड से बचाव के तरीके

WHO और NHS की गाइडलाइंस के मुताबिक, रोजमर्रा की कुछ बेहद आसान आदतों को सुधारकर इस संक्रमण से पूरी तरह बचा जा सकता है। इसके लिए हमेशा साफ और सुरक्षित पानी ही पिएं और बाहर के खुले, कच्चे या अस्वच्छ खाने से पूरी तरह दूरी बना लें। कुछ भी खाने से पहले और टॉयलेट जाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है। घर में आने वाले फल और सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह साफ करें। साथ ही, संक्रमण के अधिक खतरे वाले इलाकों में डॉक्टर की सलाह लेकर टाइफाइड का टीका (वैक्सीन) जरूर लगवाएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।