स्वास्थ्य

Heart Rhythm Disorder Symptoms: बार-बार चक्कर और दिल की धड़कन तेज होना, हार्ट रिद्म डिसऑर्डर का हो सकता है संकेत, स्टडी में खुलासा

Heart Disease Warning Signs: बार-बार चक्कर आना सिर्फ कमजोरी या लो BP का संकेत नहीं है। यह हार्ट रिद्म डिसऑर्डर का लक्षण भी हो सकता है। जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव।

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Jun 03, 2026
Heart Rhythm Disorder Symptoms
हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को दर्शाती तस्वीर (Photo- chatgtp)

Heart Rhythm Disorder: अगर आपको अक्सर चक्कर आते हैं, अचानक कमजोरी महसूस होती है या ऐसा लगता है कि दिल की धड़कन कभी बहुत तेज तो कभी बहुत धीमी हो रही है, तो इसे सिर्फ थकान या लो ब्लड प्रेशर समझकर नजरअंदाज न करें। कई मामलों में ये लक्षण हार्ट रिद्म डिसऑर्डर (Heart Rhythm Disorder) यानी दिल की धड़कन में गड़बड़ी का संकेत हो सकते हैं।

अमेरिका के ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल (Brigham and Women's Hospital) की रिपोर्ट के अनुसार, जब दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल सही तरीके से काम नहीं करते, तो दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में अरिदमिया (Arrhythmia) कहा जाता है।

क्यों आते हैं चक्कर?

हमारा दिल पूरे शरीर में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब दिल की धड़कन बहुत तेज, बहुत धीमी या अनियमित हो जाती है, तो दिमाग तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता। इसी वजह से व्यक्ति को चक्कर आ सकते हैं, सिर हल्का लग सकता है या कुछ मामलों में बेहोशी भी हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक बार-बार चक्कर आना, खासकर अगर इसके साथ दिल की धड़कन में बदलाव महसूस हो रहा हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

हार्ट रिद्म डिसऑर्डर के आम लक्षण

दिल की धड़कन में गड़बड़ी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • बार-बार चक्कर आना
  • दिल का तेज धड़कना या फड़फड़ाना
  • सांस फूलना
  • सीने में दर्द या भारीपन
  • अचानक कमजोरी महसूस होना
  • बेहोशी आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • बहुत ज्यादा थकान होना

किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?

हार्ट रिद्म डिसऑर्डर का खतरा उन लोगों में ज्यादा हो सकता है जिन्हें पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या थायरॉयड की समस्या हो। इसके अलावा धूम्रपान, अधिक शराब पीना, जरूरत से ज्यादा कैफीन लेना और लगातार तनाव में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है। बढ़ती उम्र के साथ भी इस समस्या की संभावना बढ़ जाती है।

कैसे होती है पहचान?

अगर डॉक्टर को हार्ट रिद्म डिसऑर्डर का संदेह होता है, तो वे ECG, होल्टर मॉनिटर, इकोकार्डियोग्राफी या अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं। इन टेस्ट्स से यह पता लगाया जाता है कि दिल की धड़कन सामान्य है या उसमें कोई गड़बड़ी है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Published on:
03 Jun 2026 03:47 pm