
Heart Stent Placement Hindi: जब किसी को दिल की बीमारी होती है, तो अक्सर डॉक्टर कहते हैं कि स्टेंट डालना पड़ेगा। यह नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं और सोचने लगते हैं कि पता नहीं शरीर के अंदर क्या होने वाला है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्टेंट कोई बहुत बड़ी या डरावनी चीज नहीं है, बल्कि एक छोटा सा मददगार है जो इंसान की जान बचा सकता है? आइए जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन और क्लीवलैंड क्लिनिक के आधार पर समझते हैं कि आखिर स्टेंट क्या है और डॉक्टर इसे कब और क्यों लगाते हैं।
स्टेंट को आप स्टील या किसी खास मेटल का बना एक बहुत ही छोटा, बारीक और लचीला स्प्रिंग (जालीदार ट्यूब) समझ सकते हैं। यह इतना छोटा होता है कि इसे देखने के लिए भी ध्यान लगाना पड़ता है। इसका मुख्य काम बंद या सिकुड़ी हुई नसों को अंदर से सहारा देकर चौड़ा रखना है, ताकि खून बिना किसी रुकावट के बह सके।
हमारे शरीर में नसें (जिन्हें धमनियां कहते हैं) खून को दिल और बाकी हिस्सों तक पहुंचाती हैं। उम्र के साथ या गलत खान-पान (जैसे तला-भुना खाना) की वजह से इन नसों के अंदर फैट या कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है। इसे डॉक्टर प्लाक कहते हैं। जब यह कचरा नस के अंदर बहुत ज्यादा जमा हो जाता है, तो नसें अंदर से संकरी (पतली) हो जाती हैं। इसके दिल को पूरा खून नहीं मिल पाता जिससे सीने में तेज दर्द (एंजाइना) होने लगता है। अगर नस पूरी तरह ब्लॉक हो जाए, तो खून का बहाव रुक जाता है और हार्ट अटैक आ जाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।