
When Was IVF introduce In World: जब किसी शादीशुदा जोड़े को बच्चा नहीं हो पाता, तो आज के समय में डॉक्टर उन्हें IVF कराने की सलाह देते हैं। इस तकनीक ने दुनिया भर में लाखों सूनी गोदों को भरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता-पिता बनने का सपना सच करने वाली इस तकनीक को आए पूरे 46 साल हो चुके हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) और मेयो क्लिनिक के मुताबिक, विज्ञान के इस चमत्कार की कहानी बड़ी दिलचस्प है। आइए जानते हैं कि यह सब कैसे शुरू हुआ और यह तरीका काम कैसे करता है।
इस कहानी की शुरुआत साल 1978 से होती है। 25 जुलाई 1978 को दुनिया के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म हुआ था, जिसका नाम लुईस जॉय ब्राउन है। इस कमाल के पीछे दो वैज्ञानिकों रॉबर्ट एडवर्ड्स और पैट्रिक स्टेप्टो की सालों की मेहनत थी। उन्होंने इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया था। इसी खोज के लिए आगे चलकर रॉबर्ट एडवर्ड्स को साल 2010 में नोबेल पुरस्कार भी मिला।
अगर बिल्कुल आसान शब्दों में कहें, तो जब कोई महिला नॉर्मल तरीके से प्रेग्नेंट नहीं हो पाती, तब IVF का सहारा लिया जाता है। इसमें सबसे पहले डॉक्टर महिला के शरीर से अंडे बाहर निकालते हैं। इसके बाद पुरुष के शुक्राणु (Sperm) लेकर उन्हें लैब के अंदर एक सुरक्षित माहौल में अंडे के साथ मिलाया जाता है। जब लैब में वो अंडा तैयार (फर्टिलाइज) हो जाता है और छोटा सा भ्रूण बन जाता है, तो उसे वापस महिला के पेट (गर्भाशय) में डाल दिया जाता है। इसके बाद की नौ महीने की प्रेग्नेंसी बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी बाकी महिलाओं की होती है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह तरीका उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जिन्हें इन वजहों से दिक्कत आ रही हो;
शुरुआती दिनों में यह तकनीक नई थी, इसलिए कामयाबी की उम्मीद थोड़ी कम रहती थी और लोगों के मन में कई तरह के डर भी थे। लेकिन पिछले 46 सालों में विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब यह तरीका पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित, आसान और बहुत ज्यादा कामयाब हो चुका है। आज नई तकनीकों की मदद से डॉक्टर पहले ही पता लगा लेते हैं कि बच्चे को कोई बीमारी तो नहीं होगी। यही वजह है कि आज IVF लाखों परिवारों में खुशियां बांट रहा है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।