23 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

50 के बाद प्रेग्नेंट होने की जिद! बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला, कोर्ट ने IVF टेस्ट की दी इजाजत, जानें नया नियम

IVF Age cap for Women: बॉम्बे हाई कोर्ट में 50 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं ने IVF बैन को चुनौती दी है। जानिए क्या कहता है भारत का कानून और बढ़ती उम्र में मां बनने के मेडिकल रिस्क।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

Apr 23, 2026

IVF Age Limit in India

IVF Age Limit in India (Photo- gemini ai)

IVF Age Limit in India: क्या कानून तय करेगा कि कोई महिला किस उम्र में मां बन सकती है? यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट में दो महिलाओं (उम्र 53 और 55 साल) ने एक ऐसी कानूनी दीवार को चुनौती दी है, जो उन्हें मां बनने से रोक रही है। यह मामला न सिर्फ कानूनी है, बल्कि महिलाओं की सेहत और उनके अधिकारों से भी गहराई से जुड़ा है।

आखिर विवाद क्या है? (समझें नया नियम)

भारत में साल 2021 में एक कानून आया जिसे ART (Assisted Reproductive Technology) Act कहा जाता है। इस कानून के मुताबिक, कोई भी महिला सिर्फ 21 से 50 साल की उम्र तक ही IVF या अन्य तकनीकों के जरिए मां बन सकती है। चूंकि इन दोनों महिलाओं की उम्र 50 को पार कर चुकी थी, फर्टिलिटी क्लीनिकों ने उनका इलाज करने से मना कर दिया। महिलाओं का तर्क है कि अगर वे शारीरिक रूप से फिट हैं, तो उम्र की पाबंदी उनके 'मां बनने के हक' का उल्लंघन है।

कानून बड़ा या शरीर की फिटनेस?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले पर बेहद संतुलित रुख अपनाया है। कोर्ट ने अभी कोई अंतिम फैसला तो नहीं सुनाया, लेकिन इन महिलाओं को 'मेडिकल फिटनेस टेस्ट' कराने की इजाजत दे दी है। कोर्ट अब यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या सिर्फ एक 'तारीख' (उम्र) को आधार मानकर किसी को मां बनने से रोकना सही है, या फिर हर महिला की व्यक्तिगत सेहत को देखा जाना चाहिए?

एक्सपर्ट की राय: 50 के बाद प्रेग्नेंसी में क्या हैं खतरे?

फर्टिलिटी विशेषज्ञ एवं आईवीएफ कंसल्टेंट डॉ. वी. पी. सिंह ने बतायाकि मेडिकल साइंस में उम्र सिर्फ एक नंबर नहीं है, खासकर जब बात प्रेग्नेंसी की हो। 50 साल की उम्र के बाद महिला के गर्भाशय (Uterus) और हृदय प्रणाली (Cardiovascular System) पर गर्भधारण का बोझ बहुत बढ़ जाता है। हालांकि फिटनेस टेस्ट से शारीरिक क्षमता का पता चलता है, लेकिन जेनेटिक जटिलताओं और प्री-मैच्योर डिलीवरी के जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कानून और मेडिकल प्रोटोकॉल हमेशा मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।

डॉक्टर के अनुसार प्रमुख जोखिम:

  • ब्लड प्रेशर और डायबिटीज: इस उम्र में प्रेग्नेंसी के दौरान 'जेस्टेशनल डायबिटीज' और हाई बीपी (Preeclampsia) का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
  • जेनेटिकल दिक्कतें: बढ़ती उम्र के साथ अंडों की क्वालिटी कम हो जाती है, जिससे बच्चे में जन्मजात विकार या जेनेटिक बीमारियों का रिस्क रहता है।
  • दिल पर दबाव: प्रेग्नेंसी में शरीर को ज्यादा खून पंप करना पड़ता है, जो 50 की उम्र के बाद दिल और किडनी पर भारी पड़ सकता है।

समय रहते करें 'एग फ्रीजिंग' का विचार

अगर आप करियर या किसी अन्य कारण से देर से मां बनने की योजना बना रही हैं, तो एक्सपर्ट्स 'एग फ्रीजिंग' (Egg Freezing) की सलाह देते हैं। 20 या 30 की उम्र में अपने स्वस्थ अंडों को स्टोर करके आप भविष्य में (कानूनी उम्र सीमा के भीतर) सुरक्षित प्रेग्नेंसी प्लान कर सकती हैं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।