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IVF तकनीक से मां बनने की इच्छुक महिलाओं के लिए बड़ी खबर, हो सकता है बड़ा बदलाव

MP News: पचास वर्ष से ऊपर ऐसी महिलाएं जो इन विट्रो फर्टिलिटी (आइवीएफ) तकनीक से मां बनना चाहती हैं, उनके लिए मप्र हाईकोर्ट ने पहल की है।

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indore high court

indore high court (file photo)

MP News: पचास वर्ष से ऊपर ऐसी महिलाएं जो इन विट्रो फर्टिलिटी (IVF technology) तकनीक से मां बनना चाहती हैं, उनके लिए मप्र हाईकोर्ट ने पहल की है। इंदौर खंडपीठ ने आइवीएफ कानून में बदलाव को लेकर दायर याचिका को खुद चलाने का फैसला लिया है। कोर्ट ने इसे शैक्षणिक उद्देश्य से चलाने की बात कहते हुए याचिका पर सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है। जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस बिनोद द्विवेदी की युगलपीठ ने इस केस को चलाने के लिए अधिवक्ता पीयूष जैन को न्यायमित्र घोषित किया है।

आइवीएफ तकनीक

रेवती रेंज में रहने वाली दमयन्ति और उनके पति रघुवीर ने अपने वकील पीयूष जैन की मदद से हाईकोर्ट में अप्रैल 2024 में याचिका लगाई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि दमयन्ति की उम्र 50 और पति की उम्र 55 साल हो चुकी है। वे आइवीएफ तकनीक(IVF technology) से माता-पिता बनना चाहते हैं। लेकिन सहायक प्रजनन तकनीक अधिनियम के तहत मां बनने के लिए तय उम्र से ज्यादा उम्र होने के कारण डॉक्टर मदद नहीं कर रहे। इस मामले में लगभग डेढ़ साल तक सुनवाई हुई लेकिन फैसला नहीं हुआ था।

केस जारी रखने का निर्णय

वहीं पिछले दिनों सुनवाई पर हाईकोर्ट को जैन ने बताया था कि उनके मुवक्किल से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा। ऐसे में कोर्ट ने उनसे संपर्क साधने के लिए वकील को हिदायत दी थी लेकिन पिछली सुनवाई पर वकील ने बताया कि उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया। कोर्ट ने इसके बाद ये जरूर माना कि शायद वे अब इस केस को चलाने के इच्छुक नहीं हैं लेकिन कोर्ट ने माना कि इस याचिका में सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, इसलिए कोर्ट ने शैक्षणिक उद्देश्य से केस जारी रखने का निर्णय लिया।

कानून में ये हुआ बदलाव

वर्ष 2021 में सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) की धारा-21(जी) में आइवीएफ या अन्य तरीके से गर्भधारण करने की इच्छुक महिला के लिए उम्र सीमा तय की गई है। नियम मुताबिक 21 से 50 वर्ष के बीच की महिला ही गर्भधारण कर सकती है। आयु सीमा तय करने के पीछे माता और भ्रूण दोनों के लिए स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने का उद्देश्य बताया गया है।

कोर्ट ने बनाया न्यायमित्र

कोर्ट ने पूर्व में इस केस में वकील रह चुके पीयूष जैन को ही कोर्ट की मदद के लिए न्यायमित्र बनाया है। कोर्ट ने इसके पीछे कारण दिया है कि चूंकि उन्होंने ही इस केस को तैयार किया है, ऐसे में वे इसको लेकर सही तरह से पक्ष रख सकेंगे।

कोर्ट ने स्वास्थ्य जांच कराने बनाया पैनल

1 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान आइवीएफ एक्सपर्ट डॉ. शैफाली जैन कोर्ट में पेश हुई थीं। उन्होंने बताया था कि उम्र के अलावा भी महिला गर्भाधारण के लिए स्वस्थ्य है या नहीं, आदि बातों की भी जांच की जानी चाहिए। ऐसे में उम्र के बजाय पूरी शारीरिक जांच के बाद ही इस पर फैसला लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने एक्सपर्ट की इस राय के बाद महिला की स्वास्थ्य जांच करते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज डीन को एक बोर्ड बनाने को कहा, जिसमें एक सर्जन, एक एनेस्थेटिस्ट, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और एक मनोवैज्ञानिक को रखा। इस पैनल में जांच कराने के लिए महिला पहुंची ही नहीं। उन्होंने कोई भी टेस्ट नहीं कराया और वकील से भी संपर्क में नहीं हैं।