
HMPV Virus Symptoms: मौसम बदलते ही सर्दी, खांसी और बुखार के मामले बढ़ने लगते हैं। ज्यादातर लोग इन लक्षणों को सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर खांसी लगातार बनी रहे, बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी होने लगे या बच्चा और बुजुर्ग ज्यादा कमजोर महसूस करें, तो इसके पीछे ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (Human Metapneumovirus-HMPV) नाम का वायरस भी हो सकता है।
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH), सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) और Cleveland Clinic के अनुसार, HMPV एक आम श्वसन वायरस है जो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। अधिकांश लोगों में यह हल्के सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण पैदा करता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर संक्रमण का कारण भी बन सकता है।
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस एक श्वसन संबंधी वायरस है, जिसकी पहचान पहली बार 2001 में हुई थी। NIH की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया भर में फैलने वाला वायरस है और लगभग हर व्यक्ति बचपन में कभी न कभी इसके संपर्क में आता है। यह वायरस मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या नजदीकी संपर्क से फैल सकता है।
CDC के अनुसार, HMPV के लक्षण कई बार सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही होते हैं।
NIH और CDC के अनुसार, कुछ लोगों में HMPV संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है:
इन लोगों में संक्रमण निमोनिया या ब्रोंकियोलाइटिस जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है।
HMPV के शुरुआती लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर पहचान करना मुश्किल होता है। हालांकि, यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे, सांस लेने में परेशानी हो या लक्षण तेजी से गंभीर होते जाएं, तो डॉक्टर विशेष जांच की सलाह दे सकते हैं।
CDC के अनुसार, HMPV के लिए फिलहाल कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। अधिकांश मामलों में इलाज लक्षणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित होता है:
NIH की समीक्षा में बताया गया है कि HMPV दुनिया भर में बच्चों और बुजुर्गों में श्वसन संक्रमण का एक महत्वपूर्ण कारण है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह वायरस ऊपरी और निचले दोनों श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।