
Baby Gender Determination: जब किसी महिला के गर्भवती होने की खबर मिलती है, तो परिवार और रिश्तेदारों के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है लड़का होगा या लड़की? कई बार लोग इसके लिए मां के खानपान, पेट के आकार, चेहरे की चमक या घरेलू नुस्खों को जिम्मेदार मान लेते हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है?
विज्ञान कहता है कि बच्चे का लिंग किसी घरेलू उपाय, खानपान या मां की इच्छा से तय नहीं होता। यह गर्भधारण के उसी पल तय हो जाता है, जब अंडाणु और शुक्राणु मिलते हैं।
National Human Genome Research Institute (NHGRI) के अनुसार, हमारे शरीर की लगभग हर कोशिका में 46 क्रोमोसोम होते हैं, जो 23 जोड़ों में व्यवस्थित रहते हैं। इन्हीं क्रोमोसोम में हमारे शरीर का पूरा जेनेटिक ब्लूप्रिंट छिपा होता है जैसे आंखों का रंग कैसा होगा, बाल कैसे होंगे और शरीर का विकास किस तरह होगा। इन 23 जोड़ों में से एक जोड़ा सेक्स क्रोमोसोम कहलाता है। यही तय करता है कि बच्चा जैविक रूप से लड़का होगा या लड़की। महिलाओं के पास आमतौर पर XX क्रोमोसोम होते हैं, जबकि पुरुषों के पास XY क्रोमोसोम होते हैं।
जब गर्भधारण होता है, तब मां का अंडाणु और पिता का शुक्राणु मिलते हैं। मां का अंडाणु हमेशा X क्रोमोसोम ही लेकर आता है।पिता के शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं कुछ X क्रोमोसोम वाले और कुछ Y क्रोमोसोम वाले। अब यहीं पर पूरी कहानी तय होती है।अगर X वाला शुक्राणु अंडाणु से मिलता है, तो बनने वाला संयोजन XX होगा और बच्चा लड़की होगा। अगर Y वाला शुक्राणु अंडाणु से मिलता है, तो संयोजन XY बनेगा और बच्चा लड़का होगा। यानी वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो बच्चे का जैविक लिंग पिता के शुक्राणु से तय होता है, क्योंकि वही X या Y में से कोई एक क्रोमोसोम देता है।
समाज में लंबे समय से यह गलत धारणा रही है कि लड़की पैदा होने पर मां जिम्मेदार होती है। लेकिन विज्ञान इस सोच को पूरी तरह गलत साबित करता है। चूंकि मां हर स्थिति में X क्रोमोसोम ही देती है, इसलिए लड़का या लड़की होने का फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा शुक्राणु अंडाणु तक पहले पहुंचता है X या Y। इसलिए लड़की पैदा होने पर मां को दोष देना वैज्ञानिक रूप से गलत और अनुचित है।
PMC में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, Y क्रोमोसोम पर SRY नाम का एक विशेष जीन मौजूद होता है। इसे आप एक स्विच की तरह समझ सकते हैं। जब भ्रूण में SRY जीन सक्रिय होता है, तो शरीर को पुरुष प्रजनन अंग विकसित करने का संकेत मिलता है। अगर यह जीन मौजूद नहीं होता, तो भ्रूण का विकास महिला जैविक संरचना की दिशा में आगे बढ़ता है। यानी सिर्फ एक छोटा-सा जीन पूरे विकास की दिशा बदल सकता है।
ज्यादातर मामलों में बच्चे XX या XY क्रोमोसोम के साथ जन्म लेते हैं। हालांकि कुछ दुर्लभ स्थितियों में क्रोमोसोम का पैटर्न अलग भी हो सकता है। यह एक जैविक और आनुवंशिक स्थिति होती है, जिसे डॉक्टर विशेष जांचों के जरिए समझते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।