Type 2 Diabetes Risk: क्या आप भी हर खाने के बाद मीठा खाते हैं? जानिए कैसे यह आदत धीरे-धीरे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती है। डॉ. दीपक चंद गुप्ता से समझें शुरुआती संकेत और बचाव के तरीके।
Diabetes Symptoms: कई लोगों की आदत होती है लंच या डिनर के बाद कुछ मीठा खाने की। कोई मिठाई खाता है, कोई आइसक्रीम, तो कोई केक या चॉकलेट। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि खाना खाने के बाद थोड़ा मीठा खाने से कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यही आदत आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती है।
डॉ. दीपक चंद गुप्ता, सीनियर कंसलटेंट - एंडोक्राइनोलॉजी के मुताबिक, भारतीय खाने में पहले से ही चावल, रोटी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है। ऐसे में अगर तुरंत बाद मिठाई खाई जाए, तो शरीर में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है।
जब शरीर में अचानक ज्यादा शुगर पहुंचती है, तो पैंक्रियाज को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है ताकि ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे। अगर यह प्रक्रिया रोज होती रहे, तो धीरे-धीरे शरीर इंसुलिन के असर को कम महसूस करने लगता है। इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है, जो आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) की वजह बन सकता है।
डॉक्टर बताते हैं कि डायबिटीज अचानक नहीं होती। शरीर पहले ही कई छोटे संकेत देने लगता है, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे:
अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
कम नींद, देर रात खाना, घंटों बैठकर काम करना और लगातार तनाव भी ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं। खासकर उन लोगों में जिनके परिवार में पहले से डायबिटीज की हिस्ट्री हो, उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है।
डॉक्टर के अनुसार, भारतीयों में कम उम्र और कम वजन में भी डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा देखा जाता है।
मिठाई पूरी तरह छोड़ने को लेकर उन्होंने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। लेकिन इसे रोज की आदत बनाना सही नहीं माना जाता। कभी-कभार और सीमित मात्रा में मिठाई खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
डॉ. गुप्ता का कहना है कि त्योहार या खास मौके पर मिठाई खाना नुकसानदायक नहीं है। लेकिन अगर हर खाने के बाद मीठा खाना रोज की आदत बन जाए, तो यह धीरे-धीरे शरीर को टाइप 2 डायबिटीज की तरफ ले जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।