Inherited Cancer Risk : अगर परिवार में किसी को कैंसर है या माता-पिता को कैंसर है तो बच्चे में आने का खतरा रहता है। इसको लेकर यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और कैंसर सर्जन ने जानकारी दी है।
Inherited Cancer Risk : कैंसर होने का कारण खराब लाइफस्टाइल जैसे- शराब, सिगरेट आदि का सेवन। इसका होना कुछ लोग अपनी बदकिस्मती भी मानते हैं। पर, एक कारण और है जिसे समझने की आवश्यकता है। यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (US National Cancer Institute) के अनुसार, "कैंसर खुद माता-पिता से बच्चों में नहीं फैलता है, और ट्यूमर कोशिकाओं में होने वाले जेनेटिक बदलाव भी अगली पीढ़ी में नहीं जा सकते। लेकिन, एक ऐसा जेनेटिक बदलाव जो कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है, वह विरासत में मिल सकता है, यदि वह माता-पिता की अंडाणु (Egg) या शुक्राणु (Sperm) कोशिकाओं में मौजूद हो।"
संस्थान आगे स्पष्ट करता है, "कुल कैंसर के मामलों में से 10% तक आनुवंशिक बदलावों के कारण हो सकते हैं। कैंसर से संबंधित जेनेटिक बदलाव विरासत में मिलने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि आपको कैंसर होगा ही। पर इससे कैंसर होने का रिस्क बढ़ गया है।"
इस बात को पत्रिका के रवि कुमार गुप्ता के साथ बातचीत में डॉ. जयेश शर्मा, कैंसर सर्जन ने इसको लेकर कई जरूरी बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि कैंसर छूत की बीमारी नहीं है। यह माता-पिता से बच्चों को सीधे नहीं लगता। हां, पर 'जोखिम' ट्रांसफर का खतरा रहता है। यदि आपके परिवार में कैंसर का इतिहास है, तो कैंसर हो सकता है। क्योंकि, 5 से 10 प्रतिशत कैंसर आनुवंशिक म्यूटेशन के कारण होते हैं।
1- स्तन कैंसर (Breast Cancer)
स्तन कैंसर का महिलाओं में अधिक खतरा रहता है। यह मुख्य रूप से BRCA1 और BRCA2 जीन म्यूटेशन के कारण होता है। सामान्य महिलाओं में इसका जोखिम 12% होता है, लेकिन इस म्यूटेशन वाली महिलाओं में यह 60-80% तक हो सकता है।
बचाव का तरीका: 20-25 साल की उम्र से ही स्क्रीनिंग (MRI और बाद में मैमोग्राम) शुरू कर देनी चाहिए। वजन कंट्रोल रखें और शराब से दूरी बनाए रखें।
2- ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer)
यह अक्सर देर से पता चलता है क्योंकि इसके लक्षण सामान्य लगते हैं। यह भी BRCA म्यूटेशन और लिंच सिंड्रोम से जुड़ा है। देर से पता चलने के कारण ही रिस्क अधिक रहता है।
बचाव का तरीका : महिलाओं को 20-30 साल की उम्र के बीच पेल्विक चेकअप और ब्लड टेस्ट नियमित रूप से कराना चाहिए।
3- कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer)
यह लिंच सिंड्रोम और FAP (फैमलीयल एडेनोमेटस पॉलीपोसिस) के कारण होता है। यह कैंसर युवा अवस्था में भी हो सकता है। इसके मामले आजकर अधिक देखने को मिल रहे हैं।
बचाव का तरीका: इसके लिए नियमित कोलोनोस्कोपी कराना जरूरी है ताकि कैंसर बनने से पहले ही गांठों को हटाया जा सके। फाइबर युक्त आहार और कसरत काफी मददगार है।
4- प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer)
यदि परिवार में किसी को कम उम्र में यह कैंसर हुआ है, तो इसका जोखिम 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। युवाओं को इसके लिए जागरूक होने की जरुरत है।
बचाव का तरीका : हाई रिस्क वाले पुरुषों को 40 साल की उम्र से ही स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए। फल, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन फायदेमंद माना जाता है।
5- स्किन कैंसर (Melanoma)
त्वचा कैंसर में CDKN2A जैसे जीन म्यूटेशन इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इस कैंसर से मरने के चांसेज कम होते हैं। पर सतर्क जरूर रहें। क्योंकि, गंभीर होने पर जान भी जा सकती है।
बचाव का तरीका : शरीर पर मौजूद तिल (Moles) के आकार, रंग के बदलाव को नजरअंदाज ना करें। धूप से बचाव और नियमित स्किन चेकअप जरूरी है।